भाजपा मंडल अध्यक्ष, पदाधिकारी गरीब है तो वे राजनीति क्यों कर रहे हैं, ऐसी गरीबी से राम बचाए..
– रणघोष को जारी दूसरी सूची में ऐच्छिक ग्रांट लेने वालों में भाजपा नाहड़ मंडल अध्यक्ष सरदार सिंह की पत्नी के नाम, नाहड़ के दो महामंत्री सत्यनारायण एवं प्रदीप बव्वा, नाहड़ मीडिया प्रभारी प्रवीन, बेरली मंडल अध्यक्ष दयानंद समेत लगभग सभी पदाधिकारी शामिल है
रणघोष खास. कोसली की कलम से
दैनिक रणघोष ने ऐच्छिक ग्रांट में बंदरबांट को लेकर खुलासा क्या किया भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की तरफ से धड़ाधड़ ऐसी सूची आना शुरू हो गई जिससे यह लग रहा था कि कोसली में अगर गरीबी है तो वह भाजपाईयों में हैं। जो इस पार्टी से संबंध नही रखता वह गरीब नहीं हो सकता। नतीजा भाजपा मंडल अध्यक्ष से लेकर लगभग सभी पदाधिकारियों ने ग्रांट के रूप में सबका साथ सबका विकास के विजन को जमीनी स्तर पर अमल में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां बता दें कि राज्य सरकार अपने जनप्रतिनिधियों एवं पार्टी पदाधिकारियों की अनुशंसा पर ऐसे जरूरमंद परिवारों के लिए समय समय पर ऐच्छिक ग्रांट राशि जारी करती है जिसके तहत वे अपने घरों की मरम्मत, बेटी की शादी व अन्य जरूरी कार्य में खर्च कर सके।
कोसली विधानसभा में गरीबी का अलग सा चेहरा दिखाती इस सूची पर राज्य सरकार व जिला प्रशासन एक्शन लेगा या नहीं महत्वपूर्ण नहीं है। वजह कार्रवाई के नाम पर मीडिया में बयान आएंगे और कुछ दिन बाद सबकुछ वैसा ही चलेगा जैसा चलता आ रहा है। यहां सवाल यह उठता है कि क्या सच में भाजपा के भीतर इसी तरह का रामराज है। अगर ऐसा है तो इस मानसिकता से डरिए। मीडिया में खबर देने वाले खुलकर इसलिए सामने नहीं आते क्योंकि उनके अपने निजी एजेंडे हैं। वे बुरा नहीं बनकर मीडिया को चौथा स्तंभ व आमजन की आवाज बताकर अपना काम पूरा कर लेते हैं। इस तरह के मामले मीडिया में तब तक सुर्खियों में रहते हैं जब तक भाजपा के अंदर बाहर सबकुछ ठीक नहीं हो जाए। कायदे से अगर गलत हो रहा था तो भाजपाई खुलकर सामने क्यों नहीं आते। क्या भाजपा में पार्टी का धर्म यह सिखाता है कि अगर कोई गलत कर रहा है तो उसे चुपचाप देखते रहो और पीछे के दरवाजे से मीडिया का इस्तेमाल कर लो। जाहिर है इस तरह के मामलों की उम्र बेहद छोटी होती है। सबसे बड़ी इन खुलासों से जिस पर हमला किया जा रहा है उसे भी पता है कौन कर रहा है लेकिन वह बजाय स्थिति को स्पष्ट करने के मीडिया को ही साम दंड भेद से मैनेज करने में लग जाते है। वजह मीडिया में काम करने वाले अधिकांश पत्रकार ऐसे हैं जिन्हें खुद ही नहीं पता कि पत्रकारिता किस रास्ते से होकर अपने मुकाम को तय कर रही है। इसलिए मीडिया में आधे से ज्यादा ऐसे लोग सक्रिय है जो लेखन प्रतियोगिता में भाग लेने से घबराते हैं कहीं पोल ना खुल जाए। जो ठीक ठाक है उसे अखबार चैनल मालिकों की पॉलिसी काम नहीं करने देती। कुछ अवशेष के तौर जिंदा नजर आ रहे हैं उन्हें प्रभावशाली व समाज के ठेकेदार अपने मिजाज से मैनेज करने में लग जाते हैं। इसके बाद भी काबू में नहीं आते तो आर्थिक व सामाजिक तौर पर हमला कर ऐसा माहौल बनाते हैं ताकि दूसरे पत्रकार तौर तरीकों से चलने से पहले खुद के बारे में सोचे।
भाजपा मंडल अध्यक्ष से लेकर पदाधिकारी गरीब है तो फिर बचा क्या..
रणघोष को जारी दूसरी सूची में जिस भाजपा पदाधिकारियों ने जरूरमंदों के लिए जारी ऐच्छिक ग्रांट घरों की मरम्मत व अन्य कार्यों के लिए प्राप्त की है। उसमें भाजपा नाहड़ मंडल अध्यक्ष सरदार सिंह की पत्नी के नाम, नाहड़ के दो महामंत्री सत्यनारायण एवं प्रदीप बव्वा, नाहड़ मीडिया प्रभारी प्रवीन, बेरली मंडल अध्यक्ष दयानंद समेत लगभग सभी पदाधिकारी शामिल है
20 हजार की सूची में भाजपा पदाधिकारियों की संख्या बेहिसाब
इसी तरह 20 हजार रुपए के ग्रांट की राशि की सूची भी जल्द ही उपलब्ध कराने का दावा भी भाजपा के एक धड़े ने किया है। इसमें भी आर्थिक तौर पर संपन्न और मजबूत पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता इस छोटी से ग्रांट पर भी झपटा मारते हुए नजर आ रहे हैं।