कप्तान माफी मांग कर भी अपना काम कर गए, विरोध करने वालों को मीडिया में जगह मिल गईं
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
दक्षिण हरियाणा से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी में अच्छी खासी पैठ बना चुके पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव गुर्जर समाज से माफी मांगकर भी अपना काम कर गए। कप्तान को करीब से जानने वाले अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी को रूठकर मनाना इस नेता का अपना अंदाज रहा है। चुनाव के दौरान कप्तान उन दरवाजों को भी खटखटाते हैँ जो खटपट होने की वजह से लंबे समय से बंद थे। कप्तान के गुस्से का इतिहास उस बच्चे की तरह रहा है जो कुछ समय बाद शांत होते ही उसी को गले लगा लेता है जिस पर वह बरसा था। इसलिए सोशल मीडिया पर कप्तान की वायरल हो रही दोनों विडियो को गहराई से देखिए। कप्तान को बस में बैठाकर ले जा रहे दिल्ली पुलिस के जवान हंसते हुए उन्हें पानी की बोतल देते हैं तो कप्तान एक अभिभावक की तरह उन्हें डांटते हुए इस तरह व्यवहार करते हैं मानो परिवार में कोई शरारत करने पर गुस्सा करते हैं। दिल्ली पुलिस के जवान कप्तान के मिजाज को समझ चुके थे इसलिए उन्होंने भी उस पल को उसी अंदाज में लिया। इसमें कोई शक नहीं की कप्तान ने आवेश में आकर गुर्जर शब्द का जिस तरीके से इस्तेमाल किया वह मर्यादित नहीं था। यहां कप्तान गलती कर गए वे भूल गए की उनकी विडियो कोई ओर भी बना रहा है। सोचिए कप्तान अगर पुलिस से नहीं उलझते तो देशभर के मीडिया में उनकी मौजूदगी कैसे नजर आती। कप्तान की जुबान से निकले अपशब्दों को उनके विरोधियों ने हाथों हाथ जमीन पर उतार दिया। इतना ही नहीं समाज कप्तान के रैवये से दो धड़ों में भी बंट गया। यह विवाद कहीं भारी नहीं पड़ जाए अपने पुराने तजुर्बे का इस्तेमाल करते हुए कप्तान ने सोशल मीडिया से माफीनामा जारी कर दिया और विरोध करने वालों ने इसे अपनी जीत बताते हुए विवाद को वहीं खत्म कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम का नतीजा यह रहा की कप्तान सुर्खियां बटोर गए जो किसी भी नेता की अच्छी खासी खुराक होती है। दूसरी तरफ उनके छोटे- बड़े विरोधियों को मीडिया में बने रहने की जगह मिल गईं। इसके अलावा राजनीति के इस घटनाक्रम से किसी को कुछ मिलने वाला नहीं है और ना ही अब कोई सस्पेंस बचा है।