राउत को ईडी का अब दूसरा समन, 1 जुलाई को बुलाया

रणघोष अपडेट. मुंबई से 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिवसेना नेता संजय राउत को दूसरा समन भेजा है, जिसमें उन्हें कथित पात्रा चॉल घोटाले में अब 1 जुलाई को उनके सामने पेश होने के लिए कहा गया है। राज्यसभा सांसद के लिए पहला समन 28 जून के लिए जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने काम के दायित्वों और एक अलीबाग सम्मेलन में भाग लेने के कारण तारीख बढ़ाने का अनुरोध किया था। मंगलवार को, उनके वकीलों ने मुंबई में ईडी के अफसरों से मुलाकात की और उनकी उपस्थिति की तैयारी के लिए 14 दिनों का समय मांगा। लेकिन एजेंसी ने उन्हें सिर्फ 30 जून तक की राहत दी।संजय राउत और उनके करीबी प्रवीण राउत को यह समन गोरेगांव के पात्रा चॉल में 1034 करोड़ रुपए के फ्लोर स्पेस इंडेक्स को बेचने में हुई धोखाधड़ी के मामले में भेजा है। कुछ समय पहले ईडी ने इस मामले में संजय राउत और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति कुर्क कर ली थी।इसमें प्रवीन राउत की 9 करोड़ रुपए की संपत्ति थी और संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत का दो करोड़ रुपए का एक फ्लैट भी शामिल था। संजय राउत और उनके परिवार की यह संपत्ति अलीबाग और दादर में है।

क्या है मामला?

ईडी मुंबई में एक प्लॉट के फ्लोर स्पेस इंडेक्स को धोखाधड़ी से बेचे जाने के मामले में गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जांच कर रही है। गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एचडीआईएल की सहयोगी कंपनी है। प्रवीन राउत गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में निदेशक हैं। ईडी ने अपनी चार्जशीट में इस कंपनी के साथ ही प्रवीन राउत, सारंग वधावन और राकेश वधावन को नामजद किया था। सारंग वधावन और राकेश वधावन को ईडी गिरफ़्तार कर चुकी है। ईडी को पता चला है कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी को महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी एमएचएडीए ने कुछ साल पहले मुंबई के गोरेगांव वेस्ट इलाके के पात्रा चॉल के री-डेवलपमेंट का ठेका दिया था। सूत्रों का कहना है कि प्रवीन राउत ने एमएचएडीए और एचडीआईएल के बीच में बातचीत कराई थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पात्रा चॉल में रहने वाले लोगों के लिए मकान बनाए बिना धोखाधड़ी से 1034 करोड़ रुपए का फ्लोर स्पेस इंडेक्स बेच दिया।

एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल?

ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स के किसी विपक्षी नेता को समन करने या छापेमारी के बाद वही पुराना सवाल फिर से खड़ा हो जाता है कि क्या इन एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। पिछले आठ सालों में जांच एजेंसियों की छापेमारी पर ढेरों सवाल उठे हैं कि क्यों ये एजेंसियां विपक्षी नेताओं, उनके रिश्तेदारों, करीबियों को धड़ाधड़ समन भेज रही हैं या उनके घरों-दफ़्तरों में छापेमारी कर रही हैं।

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