सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, जो ‘भगोड़ा’ हैं, उन्हें अदालत से किसी भी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक ‘भगोड़ा’ जो किसी जांच एजेंसी की पहुंच से दूर रहता है, उसे अदालत से कोई रियायत या अनुग्रह नहीं मिलना चाहिए।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि जब एक आरोपी फरार है और उसे भगोड़ा घोषित किया गया है, तो उसे सीआरपीसी की धारा 438 (गिरफ्तारी को पकड़ने वाले व्यक्ति को जमानत देने का निर्देश) का लाभ देने का कोई सवाल ही नहीं है।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एक आरोपी के मामले पर विचार करने के कारण उसके मौलिक अधिकारों को बाधित करने वाले कड़े प्रावधानों को लागू करने से व्यक्ति के दोषपूर्ण आचरण का प्रभाव दूर नहीं होता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मौलिक अधिकारों के लिए कोई भी दावा उचित रूप से संबंधित व्यक्ति द्वारा कानून की प्रक्रिया का पालन करने और प्रस्तुत किए बिना उचित रूप से नहीं किया जा सकता है।

पीठ ने कहा, “हमें यह स्पष्ट करने में कोई हिचक नहीं है कि कोई भी व्यक्ति, जिसे ‘भगोड़ा’ घोषित किया जाता है और जांच एजेंसी की पहुंच से बाहर रहता है और इस तरह सीधे कानून के साथ संघर्ष में खड़ा होता है, आमतौर पर कोई रियायत या भोग का हकदार नहीं होता है।”

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