जाति- धर्म में नहा रहे भाजपाई अब एक दूसरे पर डाल रहे कीचड़, नेता कभी मुर्ख नही होता
– हरियाणा में आप की बढ़ती सक्रियता से भाजपा में साइड इफेक्ट नजर आने लगे हैं
रणघोष खास. प्रदीप नारायण
रोहतक से भाजपा सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने पहरावर जमीन विवाद पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल से लेकर पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर व लगे हाथ भाजपा संगठन के काम करने के तौर तरीकों पर सीधा हमला बोल दिया। यह गुस्सा भगवान परशुराम के अंदाज से निकला था या जाति- धर्म की राजनीति में नहाती- धोती भाजपा के होने वाले नुकसान को रोकने के लिए था। यह आने वाला समय बताएगा। इतना जरूर है कि राजनीति में नेता कभी मुर्ख नहीं होता।
डॉ. शर्मा रविवार को रोहतक के पहरावर गांव में नवीन जयहिंद की तरफ से आयोजित गौड़ ब्राह्मण शिक्षण संस्था को दी गई जमीन को लेकर आयोजित परशुराम जयंती कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां डॉ. शर्मा ने अपनी पार्टी के सीनियर नेता एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को भरी सभा में मुर्ख बता दिया। उन्होंने कहा कि सरकार तमाशा कर ब्राह्मणों का दम देखना चाहती थी। मुख्यमंत्री जमीन देते भी नहीं और नकारते भी नहीं। उन्हें दुख है कि मुख्यमंत्री अपने दिमाग से कोई काम नहीं करता है। अरविंद शर्मा ने कहा कि 2014 में धोखा हो गया। वे मनोहर लाल के मुख्यमंत्री बनने से खफा नहीं है लेकिन रामबिलास शर्मा ने क्या गलती कर दी थी। भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में रामबिलास शर्मा का अहम रोल था परंतु मुख्यमंत्री बनने की बारी आई तो कांटे की तरह रामबिलास शर्मा को निकाल कर फेंक दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे धनखड़ का फोन आया था। उसने बताया कि जमीन पर डेवलेपमेंट चार्ज संस्था नहीं, सरकार देगी। अरविंद शर्मा ने कहा कि अगले 21 तारीख तक जमीन के कागज नहीं आए, तो वे समाज के साथ धरने पर बैठेंगे, जिसमें पूरा हरियाणा साथ रहेगा। सरकार क्या चाहती है, रोहतक जीतकर दे दिया, सोनीपत जीतकर दे दिया, मगर फिर भी कोई काम नहीं होता। मुख्यमंत्री ठीक है, मगर बहकावे में आ जाता है। अरविंद शर्मा ने हरियाणा में भ्रष्टाचार का बोलबाला बताया और कहा कि अमृत योजना में करोड़ों का घोटाला हुआ। भाजपा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं सबूत दो जांच कराएंगे। अब सबूत कहां से लाएं, सबूत तो ग्रोवर पलंग के नीचे छुपा देगा।
डॉ. अरविंद शर्मा के भाषण ने आगे की राजनीति झलक दिखा दी
डॉ. शर्मा के भाषण को गंभीरता से समझना जरूरी है। पहला वे खुद ब्राह्मण समाज से बड़े नेता है। लिहाजा इस मसले पर भाजपा सरकार के निर्णय से खफा समाज के साथ खड़े नहीं होना अपनी राजनीति बलि चढ़ना था। दूसरा डॉ. अरविंद शर्मा पैदाइश भाजपाई नहीं है। राजनीति में बदलते रंग के साथ वे बदलते रहे। तीसरा पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा हाईकमान ने ऐन वक्त पर उनकी इच्छा के बिना हरियाणा की सबसे हॉट रोहतक सीट पर उतार दिया। भाग्य ने डॉ. शर्मा का दिल खोलकर साथ दिया और कांग्रेस के ताकतवर नेता दीपेंद्र हुडडा को हराकर वे केंद्र में मंत्री बनने की मजबूत दावेदारी में आ गए। लेकिन यहां हाईकमान ने डॉ. शर्मा की किस्मत को अपनी तिजोरी में बंद कर लिया। आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। डॉ. शर्मा भाजपा के मिजाज को समझने की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उन्हें अहसास हो चुका है कि भाजपा संगठन इतना ताकतवर है कि वह उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हारने वाले पुष्कर सिंह धामी को दुबारा सीएम बना सकता है और असम चुनाव में अच्छी खासी वोट लेकर दूसरी बार सपना देख रहे सर्बानंद सोनोवाल को घर बैठाकर कांग्रेस छोड़कर भाजपाई बने डॉ हिमंत बिश्व शर्मा को ताज पहना सकता है। ऐसी एक नहीं अनेक मिशालें भाजपा हाईकमान नसीहत के तौर पर अपने नेताओं को देती आ रही है। जब से दिल्ली के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है। उसका असर हरियाणा में जिस तरह महसूस किया जा रहा है उससे भाजपा के भीतर उस धड़े को खुराक मिल गई है जो जमीन पर तो दम रखता है लेकिन संगठन में उसकी कोई हैसियत नहीं है। दक्षिण हरियाणा में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी अपना दम दिखाकर शांत बैठकर सही समय का इंतजार कर रहे हैं। यह तय है कि डॉ. अरविंद शर्मा के बदले इन तेवरों का सीधा असर भाजपा पर इसलिए पड़ेगा क्योंकि भाजपा जाति- धर्म की मजबूत राजनीति करने में माहिर है और यहां डॉ. शर्मा ने जाति का तीर ही अपनी पार्टी नेताओं पर चला दिया है। यह सीधे निशाने पर बैठेगा या इधर उधर हो जाएगा। इंतजार करना पड़ेगा। इतना जरूर है इस तीर से कोई ना कोई घायल जरूर होगा।