मध्यप्रदेश के पन्ना में खदान में काम करने वाले एक मजदूर की किस्मत खुल गई है। राजू गोंड नाम के शख्स ने पन्ना की खदानों में गड्ढे खोदने और रेत को छानने की कला में महारत हासिल कर ली है। पिछले 10 सालों से वे हीरों की तलाश कर रहे हैं। बुधवार को उन्हें कांच जैसी कोई चीज चमकती हुई मिली। पता चला यह 19.22 कैरेट का हीरा था। विशेषज्ञों ने बताया कि सरकारी नीलामी में इसकी कीमत 80 लाख रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है। गोंड ने कहा है कि वह दस सालों से इस घड़ी का इंतजार कर रहे थे।
राजू ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जब मैंने इसे अपने हाथों में लिया तभी मुझे पता चल गया कि यह हीरा है। मैं सुबह से काम कर रहा था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मुझे 10 साल तक काम करना पड़ा।” इस खोज से उत्साहित राजू ने कहा कि वे अपने बच्चों के लिए अच्छा भविष्य चाहते हैं। “मैं अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता हूं। मुझे बस यही उम्मीद है कि इससे हमारी गरीबी दूर हो जाएगी।”
राजू गोंड इस पैसे सबसे पहले अपने परिवार का 5 लाख रुपये का कर्ज चुकाएंगे। उन्होंने कहा है कि नीलामी से मिलने वाली रकम को वे अपने परिवार के सदस्यों में बांटने की योजना भी बना रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे बचे हुए पैसों से अपना घर बनाएंगे और कुछ खेती की जमीन लेंगे। गोंड ने कहा, “मैं इसके बाद भी हीरे की खोज जारी रखेंगे।” पत्थर मिलने के बाद गोंड ने इसे सरकारी अधिकारियों के पास जमा करा दिया है। पन्ना हीरा ऑफिस के एक अधिकारी अनुपम सिंह ने कहा कि हीरे को अगली नीलामी में बिक्री के लिए रखा जाएगा।
अपेक्षाकृत पिछड़ा जिला माने जाने वाला पन्ना सदियों से हीरा खनन का गढ़ रहा है। हालांकि पिछले कुछ सालों में पन्ना में हीरे के भंडार में काफी कमी आई है। इसकी मुख्य वजह अत्यधिक खनन भी है। इन दिनों वहां एक बड़ा हीरा मिलना दुर्लभ है। इससे पहले पिछले साल नोएडा के एक शख्स को 35 लाख रुपये का 8 कैरेट का हीरा मिला था।
इन खदानों में काम करने वालों को आठ घंटे काम करने के लिए 250-300 रुपये मिलते हैं। गोंड ने कहा, “हम ज्यादातर खेती या राजमिस्त्री जैसे छोटे-मोटे काम करते हैं। हम थोड़े ज्यादा पैसों की उम्मीद में हीरा खदान में भी काम करते हैं।” इससे पहले आजीविका के लिए वह ट्रैक्टर चलाया करते थे। नोएडा में मिले हीरे जैसी घटनाओं से उन्हें खदान में काम करने की प्रेरणा मिली।