भारत का बजट पेश किया जा चुका है और मध्यमवर्गीय के बीच एक बार फिर चर्चाएं टैक्स पर आकर थम गईं हैं। इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि सरकार की तरफ से टैक्स की गणना कैसे की जाती है। उनका कहना है कि टैक्स ऐसे ही हवा में गणना के बाद तय नहीं किया जाता है। सरकार ने इनकम टैक्स के नए रिजीम में दरों में कुछ बदलावों की घोषणा की है।
हाल ही में सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा, ‘टैक्स सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ाए गए हैं कि मुझे और ज्यादा पैसा चाहिए…। यह फैसला इस आइडिया पर आधारित है कि हर एसेट क्लास को समान समझा जाए।’ उन्होंने इस बजट को भविष्य के लिहाज से बेहतर बताया है। सीतारमण ने मंगलवार को लगातार 7वीं बार देश का बजट पेश किया था।
सीतारमण ने मंगलवार को अपने बजट भाषण में अचल संपत्तियों के मामले में लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर की दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत करने की घोषणा की। हालांकि, इसके साथ ‘इंडेक्सेशन लाभ’ (निवेश मूल्य पर मुद्रास्फीति के प्रभाव का आकलन) को हटा दिया गया है। ऐसे में अब इस बजट प्रस्ताव को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि अपनी संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति को अधिक पूंजीगत लाभ कर चुकाना होगा।
इस संबंध में राजस्व सचिव ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘यह काफी हद तक चीजों को सरल बनाने की पहल है। कुछ लोगों ने इंडेक्सेशन हटाने पर आशंका जताई है। मैं उनकी चिंताओं को दूर करना चाहता हूं।’ मल्होत्रा ने कहा, ‘इंडेक्सेशन प्रावधान हटाने के साथ ही पूंजीगत लाभ कर की दरों को 20 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे लंबी अवधि में रियल एस्टेट में निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों को फायदा होगा क्योंकि इस निवेश पर मुनाफे की दर 10-11 प्रतिशत से अधिक है।’
उन्होंने कहा कि इसमें निवेशकों को रोलओवर लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘अगर आप संपत्ति की बिक्री से मिली रकम को दोबारा घर खरीदने में निवेश कर रहे हैं तो एक करोड़ रुपये तक के पूंजीगत लाभ पर कोई कर नहीं लगेगा।’