37 साल पहले की वह खौफनाक रात… जब एक झटके में ‘मुर्दा’ हो गया था पूरा शहर, हादसे के बाद भी बुरा असर

37 साल पहले की वह रात कोई नहीं भूल सकता जिसे कुख्यात चेर्नोबिल परमाणु हादसे (Chernobyl Nuclear Disaster) के रूप में जाना जाता है. इसे दुनिया का सबसे बुरा परमाणु हादसा माना जाता है. यह हादसा 26 अप्रैल 1986 को पूर्व सोवियत संघ के चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Chernobyl Nuclear Power Plant) में हुआ था. (सभी फोटो Reuters)


1:- हादसा एक परमाणु रिएक्टर के नियमित सुरक्षा परीक्षण के दौरान हुआ. संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस हादसे में तुरंत 50 लोग मारे गए थे. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का उल्लेख है कि रेडिएशन के प्रभाव के कारण अनुमानित 3940 लोग कैंसर से मर गए.

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2:- अंतरराष्ट्रीय चेर्नोबिल हादसा स्मरण दिवस 26 अप्रैल को वार्षिक रूप से उन लोगों की याद और सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने अपनी जान इस हादसे में गंवाई. आइए जानते हैं इस हादसे के बारे में कुछ प्रमुख तथ्य.

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3:- चेर्नोबिल हादसा रिएक्टर के 20 मिनट के बंद होने के बाद हुआ, जिसके कारण एक रासायनिक विस्फोट हुआ जिसने हवा में लगभग 520 घातक रेडियोधर्मी रसायनों को छोड़ा. परमाणु विकिरण रिसाव यूक्रेन, बेलारूस और रूस के वर्तमान क्षेत्रों में फैल गया.

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4:- आधिकारिक सोवियत संघ के आंकड़ों के अनुसार, हादसे के बाद रेडिएशन विषाक्तता के तत्काल प्रभाव से 31 लोगों की मौत हो गई. वहीं WHO के अनुसार हादसे में तीव्र रेडिएशन सिंड्रोम से लगभग 50 आपातकालीन कर्मचारियों की मृत्यु हो गई.

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5:- इस हादसे को रोकने के लिए 600,000 नागरिक और सैन्य कर्मी आए थे. वे रेडिएशन से बुरी तरह प्रभावित हुए. संयुक्त राष्ट्र ने 2005 में भविष्यवाणी की थी कि अनुमानित 4000 लोग दूषित क्षेत्रों से रेडिएशन विषाक्तता के दीर्घकालिक प्रभाव से मरेंगे.

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6:- रेडिएशन से प्रभावित नौ बच्चों को थायराइड कैंसर हो गया और उनकी मृत्यु हो गई. उन्होंने उन गायों के दूध का सेवन किया जिसने रेडियोधर्मी घास खाई थी. ऐसा कहा जाता है कि रेडिएशन के संपर्क में आने वाले माता-पिता से पैदा हुए कई बच्चों में जन्म दोष और अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याएं भी आईं.

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7:- हालांकि BBC ने बातया कि इसके पर्याप्त सबूत नहीं हैं. चेर्नोबिल में रेडिएशन फैलने के बाद निकासी के प्रयासों के दौरान हजारों जानवर मारे गए थे. चेर्नोबिल के श्रमिकों और निवासियों को अधिकारियों द्वारा संयंत्र के स्थल पर अपने कुत्तों को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था.

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8:- रेडिएशन फैलने से रोकने के लिए कई जानवरों को मार डाला गया था. कुछ कुत्ते चमत्कारिक रूप से बच गए और उनके वंशज आवारा जानवरों की तरह क्षेत्र में रहने लगे, जिनकी देखभाल गार्ड करने लगे. ये कुत्ते लोगों को उम्मीद देते हैं कि मौत और तबाही के बावजूद जीवन फल-फूल सकता है.

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Story Credit (News18 India)