जंतर मंतर पर आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके को लेकर अटकलों का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर ये दावे भी किए जा रहे हैं कि वह अमेरिका वापस चले गए हैं। हालांकि, अब उनकी मां अनीता दीपके ने संकेत दिए हैं कि वह भारत में ही हैं और जल्द घर लौट सकते हैं। खास बात है कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने दीपके के लिए सुरक्षा की मांग की थी।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आंदोलन खत्म होने के कुछ समय बाद ही दीपके घर लौटने वाले थे। हालांकि, टायफाइड होने के कारण उन्होंने यात्रा टाल दी थी। अब अखबार से बातचीत में उनकी मां ने बताया, ‘हमें अभी पता चला है कि उसे वापस आने में अभी चार से पांच दिन और लगेंगे।’
कहां है अभिजीत दीपके
25 जुलाई को दीपके ने एक वीडियो मैसेज के जरिए बताया था कि वह टायफाइड से जूझ रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक फोटो पोस्ट किया गया था, जिसमें दीपके इलाज कराते नजर आ रहे थे। खबर है कि वह दिल्ली में ही इलाज करा रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने लिखा, ‘अगर पुलिस की तरफ से छात्रों को परेशान किया जाना जारी रहता है, तो कॉकरोच जनता पार्टी बड़े शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ जवाब देगी।’
मंत्री ने मांगी थी सुरक्षा
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने रविवार को कहा कि दीपके को सुरक्षा मिलनी चाहिए। औरंगाबाद पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी मंत्री शिरसाट छत्रपति संभाजीनगर के वालुज एमआईडीसी इलाके में दीपके के परिवार से मिलने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
मंत्री ने कहा, ‘उनके माता-पिता परेशान थे, क्योंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें। वह परिवार की तरह हैं और मैं यहां केवल प्रभारी मंत्री के तौर पर नहीं आया हूं। अभिजीत के महाराष्ट्र पहुंचने पर उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। मैं इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करूंगा।’ उन्होंने कहा कि वह दीपके के परिवार को 25 साल से ज्यादा समय से जानते हैं और उन्होंने 30 साल के कार्यकर्ता की सेहत के बारे में भी जानकारी ली थी।
अमेरिका वापस जाने की अटकलें
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे थे, जिसके बाद दावा किया जा रहा था कि दीपके अमेरिका वापस लौट गए हैं। हालांकि, उनके वापस लौटने की योजनाओं को लेकर सीजेपी या संस्थापक की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। दिल्ली में आंदोलन की शुरुआत करने से पहले वह बॉस्टन में पढ़ाई कर रहे थे।