क्रिकेटर आकाश दीप और मुकेश कुमार बने DSP, क्या है इस पद का रुतबा; कितनी मिलती है सैलरी

DSP Salary and Power : क्रिकेट की पिच पर अपनी रफ्तार से दिग्गज बल्लेबाजों के होश उड़ाने वाले दो धाकड़ गेंदबाज अब जल्द ही खाकी वर्दी में नजर आएंगे। बिहार के दो लाल आकाश दीप और मुकेश कुमार, जिन्होंने अपनी कातिलाना गेंदबाजी और कड़ी मेहनत से टीम इंडिया तक का सफर तय किया, अब एक बिल्कुल नए और दमदार अवतार में दिखने वाले हैं। बिहार सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी खास नीति के तहत इन दोनों ही क्रिकेटरों को सीधे डीएसपी के पद पर नियुक्त किया है। यह खबर सामने आते ही उनके चाहने वालों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सच कहें तो, जिस रुतबेदार पद को पाने के लिए देश के लाखों युवा दिन-रात एक करके बीपीएससी (BPSC) जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, वो मुकाम इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल के दम पर हासिल कर लिया है।

मुकेश कुमार और आकाश दीप, दोनों की ही कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गोपालगंज के रहने वाले मुकेश कुमार ने कभी टेनिस बॉल से क्रिकेट की शुरुआत की थी। पिता ऑटो चलाते थे और परिवार की माली हालत कुछ खास नहीं थी, लेकिन मुकेश ने हार नहीं मानी। वहीं, रोहतास जिले के आकाश दीप का सफर भी आंसुओं और संघर्षों से भरा रहा है। एक समय ऐसा था जब उन्होंने अपने पिता और बड़े भाई को खो दिया था, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनकी दीवानगी और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया। आज ये दोनों न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहरा रहे हैं, बल्कि बिहार पुलिस के बड़े अधिकारी भी बन गए हैं।

अगर आप सोच रहे हैं कि डीएसपी बनना महज एक सरकारी नौकरी है, तो आप गलत हैं। पुलिस महकमे में डीएसपी का पद एक बेहद अहम और राजपत्रित यानी गजटेड ऑफिसर की रैंक होती है। जब एक डीएसपी अपनी वर्दी पहनता है, तो उसके कंधों पर चमकते हुए तीन सितारे लगे होते हैं। यह बैज उनकी ताकत और कानून के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सबसे बड़ा सबूत है। कई बार डीएसपी को एक पूरे सब-डिवीजन की जिम्मेदारी दी जाती है, जिसे एसडीपीओ कहते हैं। इस स्थिति में उनके अंडर में 4 से 5 पुलिस स्टेशन आते हैं। इसके साथ ही किसी भी बड़े इलाके में कानून व्यवस्था कायम रखना, बड़े अपराधों की जांच करना और अपने से नीचे के अधिकारियों (जैसे इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर) का नेतृत्व करना एक डीएसपी के ही जिम्मे होता है। इलाके में उनका रौब और रुतबा देखते ही बनता है।

रुतबे और पावर के साथ-साथ इस पद पर मिलने वाली तनख्वाह भी काफी शानदार होती है। बिहार में एक डीएसपी को पे लेवल 9 के तहत सैलरी दी जाती है। सैलरी की बात करें तो बेसिक पे 53,100 रुपये से शुरुआत होती है। साथ ही महंगाई भत्ता यानी डीए 50% के करीब 26,550 (लगभग) होता है। मकान किराया भत्ता 4,200 से 8,400 रुपये शहर के अनुसार। यात्रा भत्ता 2,000 – 4,000 मिलते हैं। यानी शुरुआती ग्रॉस सैलरी 85,000 – 92,000 प्रतिमाह हो जाती है। ध्यान दें कि इसमें से पीएफ (PF) और टैक्स कटने के बाद, एक नए डीएसपी के खाते में हर महीने लगभग 70,000 से 75,000 की इन-हैंड सैलरी आती है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, यह सैलरी लाखों में पहुंच जाती है।

डीएसपी की असली ताकत सिर्फ उनकी सैलरी में नहीं, बल्कि उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं में छिपी होती है। एक अधिकारी के तौर पर आकाश दीप और मुकेश कुमार को कई शानदार भत्ते मिलेंगे। रहने के लिए एक बेहतरीन सरकारी बंगला या क्वार्टर मिलता है। सफर और ड्यूटी के लिए एक नीली बत्ती वाली सरकारी गाड़ी (अमूमन बोलेरो या स्कॉर्पियो) और एक ड्राइवर हमेशा साथ रहता है। रुतबे के हिसाब से सुरक्षा के लिए अंगरक्षक भी मुहैया कराए जाते हैं। खुद के और परिवार के लिए शानदार मेडिकल सुविधाएं, फ्री टेलीफोन बिल और बिजली भत्ते जैसी सहूलियतें भी इस पैकेज का हिस्सा हैं।

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