नंदीग्राम उपचुनाव में रोचक हुआ मुकाबला: TMC नेता अबु ताहिर ने चुनाव लड़ने से किया इनकार, ममता बनर्जी को उतरने की सलाह

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले TMC नेता अबु ताहिर ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और ममता बनर्जी को मैदान में उतरने की सलाह दी। जानिए 2021 और 2026 के चुनाव में TMC की हार और इस बार के राजनीतिक समीकरण।

पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम उपचुनाव लगातार दिलचस्प होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर ही चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अबु ताहिर ने नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को ही मैदान में उतरने की सलाह दी है। अबु ताहिर के बयान के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि आखिर तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम से किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी।

नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नंदीग्राम में मजबूत प्रत्याशी उतारने की है, क्योंकि पिछले दो चुनावों में यहां तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है।

अबु ताहिर ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

वरिष्ठ तृणमूल नेता अबु ताहिर ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनसे नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने के लिए कहा गया तो वह इनकार कर देंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को खुद चुनाव मैदान में उतरने की सलाह दी।

अबु ताहिर का कहना है कि जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, तब ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ने आई थीं। ऐसे में अब उनसे चुनाव लड़ने की उम्मीद क्यों की जा रही है। उन्होंने पार्टी के 15 वर्षों के शासन के दौरान खुद को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने वर्षों तक उन्हें तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं माना गया और अयोग्य समझा गया, तो अब उन्हें चुनाव में उतारकर बलि का बकरा क्यों बनाया जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव लड़ने के बारे में उनकी राय मांगी गई तो वह मना कर देंगे।

क्या नंदीग्राम से फिर उतरेंगी ममता बनर्जी?

अबु ताहिर के बयान के बाद ममता बनर्जी के नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव और तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान के बीच ममता बनर्जी का खुद मैदान में उतरना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

कुछ नेताओं के अनुसार विधायक बनने के बाद ममता बनर्जी विधानसभा में सीधे लोगों के मुद्दे उठा सकती हैं और राज्य की राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकती हैं। हालांकि, ममता बनर्जी की ओर से अभी तक नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता अखिल गिरी को संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखे जाने की चर्चा भी है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक उनके नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बैठक में TMC की गैरमौजूदगी से भी उठे सवाल

नंदीग्राम उपचुनाव की तैयारियों के बीच मंगलवार को मजिस्ट्रेट की ओर से एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में लगभग सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।

तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों के बैठक में शामिल नहीं होने को कुछ लोग उम्मीदवार तय नहीं होने से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इस गैरमौजूदगी को लेकर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

बागी गुट ने ममता और अभिषेक को दी चुनौती

तृणमूल कांग्रेस के भीतर मौजूद दूसरे गुट ने भी नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया है। ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने अबु ताहिर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब उन्हें ही चुनाव नहीं लड़ना है तो उन पर दबाव क्यों बनाया जाए।

रिजू दत्ता ने कहा कि अगर ममता बनर्जी चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं हैं तो उनके भतीजे और पार्टी के प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी को ही नंदीग्राम से चुनाव लड़ना चाहिए। इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

2021 और 2026 में TMC को मिली हार

नंदीग्राम उपचुनाव इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस को इस सीट पर लगातार दो चुनावों में झटका लग चुका है। 2021 के विधानसभा चुनाव में खुद ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतरी थीं। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के शुभेंदु अधिकारी के हाथों 1,956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम का परिणाम तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में नहीं गया। पार्टी के उम्मीदवार पवित्र कर को नौ हजार से अधिक वोटों के अंतर से हार मिली। दोनों चुनावों में नंदीग्राम से जीत दर्ज करने वाले नेता शुभेंदु अधिकारी ही रहे।

हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में भवानीपुर सीट को बरकरार रखा। ऐसे में नंदीग्राम उपचुनाव अब तृणमूल कांग्रेस के लिए केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ा मुकाबला भी बन गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम से किसे उम्मीदवार बनाती है। ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरती हैं, अभिषेक बनर्जी को उतारा जाता है या किसी स्थानीय वरिष्ठ नेता पर भरोसा किया जाता है, इसका फैसला आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नंदीग्राम के चुनावी समीकरण को काफी हद तक तय करेगा।

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