विजय माल्या भी बनना चाहते हैं ‘कॉकरोच’, बोले- शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो

भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने अपने खिलाफ हुई कथित कार्रवाई और ‘अन्याय’ का हवाला देते हुए खुद की तुलना ‘कॉकरोच’ से की है। माल्या ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उन्होंने जितनी नाइंसाफियां झेली हैं और अब भी झेल रहे हैं, उन्हें देखते हुए वह सोचते हैं कि क्या उन्हें कॉकरोच बन जाना चाहिए। उनके मुताबिक शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में बना हुआ है।

माल्या ने क्या कहा?

विजय माल्या ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

माल्या का यह बयान उनके खिलाफ चल रहे लंबे कानूनी और वित्तीय विवादों के संदर्भ में आया है। वह लगातार दावा करते रहे हैं कि उनके साथ कार्रवाई के दौरान न्याय नहीं हुआ और उनकी संपत्तियों से बैंकों तथा जांच एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम की वसूली की है।

सोशल मीडिया राजनीति में ‘कॉकरोच’ क्यों चर्चा में?

साल 2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया और युवा राजनीति में एक अलग ही प्रतीक बन गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके बताए जाते हैं। आंदोलन ने बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक आवाज जैसे मुद्दों को उठाया।

सीजेपी का नाम उस समय चर्चा में आया, जब कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने को लेकर विवाद हुआ। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के रूप में स्वीकार करने के बजाय उसे ही व्यंग्यात्मक पहचान में बदल दिया।

धीरे-धीरे यह आंदोलन सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंचा और शिक्षा तथा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन भी हुए। इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन के दबाव से जोड़कर देखा गया।

कौन हैं विजय माल्या?

विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल रहे हैं। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। किंगफिशर एयरलाइंस के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार की ओर से उन्हें भारत वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी लंबे समय से चलती रही है।

माल्या अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और सरकारी कार्रवाई पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। हालिया बयान में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन में कानूनी प्रतिबंधों के कारण वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

संपत्ति जब्ती और रकम को लेकर क्या दावा है?

माल्या ने दावा किया है कि उनकी करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। हालांकि यह आंकड़ा माल्या की ओर से किया गया दावा है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

सीजेपी फिर कानूनी विवादों में

कॉकरोच जनता पार्टी हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में सीजेपी समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया। एक प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर भी आंदोलन हुआ।

9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले में संबंधित प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

इसी बीच सीजेपी से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सीजेपी, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दो करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

ऐसे में विजय माल्या का खुद को ‘कॉकरोच’ से जोड़ना महज एक सोशल मीडिया टिप्पणी है या मौजूदा ‘कॉकरोच’ आंदोलन पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष, इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। हालांकि इतना जरूर है कि माल्या के इस बयान ने एक बार फिर ‘कॉकरोच’ शब्द को भारतीय सार्वजनिक और सोशल मीडिया बहस के केंद्र में ला दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *