लंका के रावण से खतरनाक है आज का रावण होशियारपुर- बल्लभगढ़ की घटनाएं चीख- चीखकर यह बता रही है..

रणघोष खास. देशभर से 

आज दस सिर वाले रावण तो नहीं हैं, लेकिन एक ही सिर में दस दिमागों की घृणित, कुत्सित और कुंठित मानसिकता देखने को ज़रूर मिल जाती है। आज असंख्य रावण हमारे इर्द-गिर्द हैं और उनका मुकाबला करने के लिए राम जैसे प्रतापी राजा भी नहीं हैं। पंजाब के होशियापुर जिले में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद की गई हत्या और हरियाणा के बल्लभगढ़ में कॉलेज से घर जा रही लड़की का जबरदस्ती अपहरण करना और कामयाब नहीं होने पर  सरेआम गोली मारना। यह घटनाएं बताने के लिए काफी है कि लंका के रावण से खतरनाक है आज का रावण। जो कभी क्रोध, तो कभी प्रतिशोध या वासना के रूप में सामने आता है। महिलाओं को लेकर कुंठित और कुत्सित सोच रखने वाले कलयुग के असली रावण हैं.। दशहरे से पहले हम नवरात्रि के रूप में नारी शक्ति की उपासना करते हैं और दशहरे पर बुराई का अंत, मगर सदियों से चली आ रही यह परंपरा भी हमारे अंदर के रावण का दहन नहीं कर पाई है।रावण को जानने के लिए सात समुंदर पार जाने की जरूरत नहीं है. नजरों को बस कुछ क्षण के लिए सड़क पर टिकाने की देर है, न जाने कितने रावण नजर आ जाएंगे. जिनकी निगाहें महिलाओं के सीने पर हर रोज नश्तर सा वार करती हैं। रामायण काल का रावण सीता की सुंदरता पर मोहित जरूर हुआ था, लेकिन उसने कभी वासना के विचारों को पनपने नहीं दिया. उसने कभी स्त्री को कामोत्तेजना की पूर्ति के साधन के रूप में नहीं देखा, पर आज स्थिति एकदम उलट है। देश से हर कोने से बच्चियों से लेकर प्रौढ़ और वृद्ध महिलाओं से जोर-जबर्दस्ती की खबरें लगातार आ रही है, उस वक्त ऐसा करने वालों को न तो नारी में मां दुर्गा नजर आती हैं और न लंकापति रावण का हाल।. हम वासना में अंधे हो जाते हैं और इस दृष्टि लोप को परमानन्द की संज्ञा दे बैठते हैं. इसलिए कलयुग का रावण द्वापर युग के रावण से ज्यादा शक्तिशाली और खतरनाक है। जब तक इस रावण का दहन नहीं होता, तब तक दशहरे के उल्लास का कोई अर्थ नहीं. महज पुतले को आग लगा देने से बुराई का अंत नहीं होगा, हमें वैचारिक रावण के वध के लिए राम बनना होगा।  हमें स्त्री के प्रति अपने मन में वही आदर और सम्मान जागृत करना होगा, जो थोड़ी देर के लिए ही सही मगर मां दुर्गा के चरणों में शीश झुकाते समय महसूस होता है। जिस दिन सड़क पर चल रही महिला को देखकर वासना कुलांचे मारना बंद कर दे, समझ लीजियेगा आपने अपने अंदर के रावण का दहन कर दिया है और वही सही मायनों में असली दशहरा होगा. बुराई पर अच्छाई की जीत.

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: