राजनीति में भाग्य भी अपना दखल रखता है, यह रवि यादव से से पूछ लिजिए
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
कोसली विधानसभा सीट पर एक नाम चर्चा में आया ओर वापस वही लौट गया जहां से वह आया था। यहां चर्चा हो रही है केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की राजनीति जमीन की रखवाली करने वाले उनके निजी सचिव रवि यादव की। जिसे इस बार टिकट की दावेदारी में सबसे आगे माना जा रहा था। बातों ही बातों में इशारा भी मिल चुका था और वे तैयारी में भी जुट हुए थे। अचानक पूरा घटनाक्रम बदल गया ओर ऐसे शख्स अनिल डहीना को टिकट मिल गई जिसकी राजनीति समझ को रवि यादव ने ही एक समय में समझदार बनाकर राव के पास चर्चा के लिए भेजा था। यहां की राजनीति में रवि यादव एक ऐसा नाम रहा है जिसकी धमक क्षेत्र में विधायक या मंत्री से कम नही होती थी। राव इंद्रजीत की जवान राजनीति से जुड़कर उम्र दराज की दहलीज तक साथ देने वाले रवि यादव ने जब अपनी निजी जिंदगी में इसी राजनीति को अपनाना चाहा तो वह उसी तरह दूर हो गई जिस तरह बेटी शादी के बाद अपने माता पिता से दूर होकर दूसरे घर में जाने के लिए विदा लेती है। सोचिए राव इंद्रजीत सिंह जैसे कद्दावर नेता की राजनीति को 40 साल से अधिक समय तक बिना थके और रूके रेवाड़ी से दिल्ली तक संजोकर सुरक्षित रखते आए इस 70 पार शख्सियत के जीवन में यही राजनीति चुपचाप दिल्ली से बिना टिकट के वापस लौट आएगी। यही राजनीति में भाग्य के साथ देने या नही देने का सीधा सबूत है।