झारखंड नहीं जाएंगे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, बोले- आंदोलन का चेहरा देवेंद्र महतो ही रहें

जंतर-मंतर आंदोलन के बाद दीपके ने झारखंड के छात्रों को समर्थन देने की बात कही; लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सरकार को घेरा

रणघोष न्यूज़। छत्रपति संभाजीनगर।

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने झारखंड में चल रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में खुद शामिल होने को लेकर स्थिति साफ कर दी है। दीपके ने कहा कि वह फिलहाल रांची जाकर आंदोलन में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वह नहीं चाहते कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा और नेतृत्व छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से हटकर उनके इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाए।

दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी टीम पहले ही झारखंड पहुंच चुकी है और आंदोलनकारियों के साथ लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं और उनका उद्देश्य आंदोलन को मजबूत करना है, न कि खुद उसका चेहरा बनना।

उन्होंने कहा कि देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और उनकी टीम जमीन पर उनके साथ खड़ी है। दीपके के मुताबिक, जब महतो विधानसभा की ओर जा रहे थे, तब भी उनकी टीम उनके साथ मौजूद थी। उनका कहना है कि इस समय जरूरी यह है कि छात्रों की मांगों और आंदोलन पर ध्यान बना रहे।

दरअसल, झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। छात्रों ने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई है। जुलाई के अंत में रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया गया था। इसके बाद आंदोलनकारियों ने पदयात्रा और विधानसभा घेराव की रणनीति भी घोषित की थी।

अभिजीत दीपके ने रांची में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। दीपके ने कहा कि छात्रों को अपने भविष्य और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने का अधिकार है और उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब राजनीतिक दल प्रदर्शन करते हैं तो पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग रवैया दिखाई देता है, जबकि छात्रों के प्रदर्शन में बल प्रयोग किया जाता है। दीपके ने दावा किया कि उनकी देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत हुई है और पुलिस कार्रवाई में महतो को भी चोट लगी है।

हालिया घटनाक्रम में विधानसभा मार्च के बाद देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी स्थिति गंभीर बताई गई।

दीपके ने कहा कि वह झारखंड के छात्रों के संपर्क में हैं और उनकी टीम आंदोलन को हरसंभव सहयोग दे रही है। उनके मुताबिक, आंदोलन में व्यक्तिगत मौजूदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि छात्रों की मांगों को मजबूती से उठाया जाए और आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों को समर्थन दिया जाए।

झारखंड में छात्रों का यह आंदोलन अब राज्य की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

दीपके के रुख से यह स्पष्ट है कि वह आंदोलन को समर्थन तो दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल खुद रांची जाकर उसकी अगुवाई करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि आंदोलन का केंद्र छात्रों की मांगें और देवेंद्र नाथ महतो का नेतृत्व ही रहना चाहिए।

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