भाजपा आ बैल मुझे मार की राह पर चल पड़ी है

भाजपा संकल्प घोषणा पत्र ने  रेवाड़ी- बावल में अपने उम्मीदवारों को मुसीबत में डाला


    आरटीआई से मांगी गई जानकारी ओर घोषणा पत्र एक दूसरे की पोल खोल रहे हैं

  भाजपा नेता बावल तक मैट्रो लाने  का दावा कर रहे हैं जबकि उनके घोषणा पत्र में  इसे धारूहेड़ा तक दिखाया गया है।


रणघोष अपडेट. रेवाड़ी. बावल से ग्रांउड रिपोर्ट

 हरियाणा विधानसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का घोषणा पत्र उसकी जीत का मूल मंत्र होता है। इसी पत्र के बूते पर पार्टी पूरी ताकत के साथ मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट मांगती है। चुनाव में घोषणा पत्र एक तरह से जीत में संजीवनी बूटटी की तरह काम करता है। लेकिन रेवाड़ी- बावल की सीटों पर भाजपा का यह घोषणा पत्र आ बैल मुझे मार वाला साबित होने जा रहा है। जिसमें घोषणा पत्र तैयार करने वाली कमेटी और जमीन पर राजनीति करने वाले नेताओं का दावा झूठ साबित हो रहा है। इस घोषणा पत्र में दिल्ली से धारूहेड़ा तक मैट्रो लाने की बात कही गई है जबकि आरटीआई से मांगी गई जानकारी में पहले चरण तक इसे बावल तक बताया गया है जिसको लेकर यहा के तमाम सामाजिक संगठन ओर आमजन लामंबंद होकर इस आवाज को सरकार तक पहुंचाते आ रहे हैं। इतना ही 10 हजार से ज्यादा स्कूली विद्यार्थियों ने पीएम नरेंद्र मोदी एवं हरियाणा सीएम को पोस्टकार्ड लिखकर पहले चरण में मैट्रो को बावल तक लाने की जायज मांग को  पूरा करने की अपील की थी। कमाल की बात यह है कि यहां से भाजपा के सभी छोटे बड़े नेता भी इस मुद्दे पर आमजन के साथ है ओर सरकार से इसे पूरा कराने का भरोसा भी दिलाते रहे जबकि भाजपा का घोषणा पत्र उन्हें आइना दिखा रहा है।  

 घोषणा पत्र सही या आरटीआई की जानकारी, यह स्पष्ट करना होगा

 भाजपा के घोषणा पत्र में आरआरटीएस के तहत मैट्रो पहले चरण में दिल्ली से धारूहेड़ा तक आ रही है जबकि एनसीआरटीसी से मांगी गई जानकारी के अनुसार पहले चरण में मैट्रो को रेवाड़ी,बावल तक लाना है। यानि कागजों में कुछ ओर बताया जा रहा है और धरातल पर तस्वीर कुछ ओर है।  यहा के लोगों को आठ महीने पहले ही पता चल गया था की मैट्रो के रूट को छोटा करके इसे धारूहेड़ा तक कर दिया गया है। इसके बाद से यहां की जनता में जबरदस्त रोष है।  

 2009 में फाइनल हुई थी मैट्रो लाने की परियोजना

2009 में कांग्रेस की यूपीए एवं हरियाणा में कांग्रेस हुडडा सरकार के समय में मैट्रो परियोजना की शुरूआत हुई थी। इस पर काम भी शुरू हो गया था। पहले यह कार्य एमआरटीस कंपनी को दिया गया था जिसके तहत एचएसआईआईडीसी ने बावल तक के गांवों की जमीन अधिग्रहण कर उनका मुआवजा तक दे दिया था। 2014 में भाजपा सरकार आने के बाद से आज तक इस परियोजना पर कोई अमल नहीं हुआ। जब कांग्रेस से रोहतक सांसद दीपेंद्र हुडडा ने राज्य सभा एवं सार्वजनिक सभाओं में मैट्रो परियोजनाओं पर भाजपा सरकार पर हमले करने शुरू किए तब हलचल शुरू हुईं।

 सीधे 31 विधानसभा पर असर डाल रही यह परियोजना

  यह परियोजना हरियाणा की 31 विधानसभा पर सीधा असर डाल रही है। दिल्ली से पानीपत करना, फरीदाबाद, रोहतक, बावल वाया अलवर तक इसका विस्तार होना है। इस पूरे प्रोजेक्ट में केवल दिल्ली से बावल तक की रिपोर्ट को बदलकर इसका रूट छोटा करके बावल से धारूहेड़ा तक कर दिया। 8 माह पहले पता चलते ही क्षेत्र के लोगों में रोष फैल गया। उनका आरोप था की 2009 का प्रोजेक्ट नियमानुसार 2018 तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन उस पर अमल तो दूर रूट को ही छोटा कर दिया गया। यह इलाके साथ सरासर नाइंसाफी है।

भाजपा को भारी पड़ सकता है यह मुददा

इस मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह ने अधिकांश जनसभओं में मैट्रो को पहले चरण में बावल तक लाने का वायदा कर वोट मांगे थे। अब वे किस हैसियत से जनता के सामने इस बात को दोहराएंगे जब घोषणा पत्र में ही इसे धारूहेड़ा तक दिखाया है। इसी तरह तमाम भाजपा नेता भी इस परियोजना पर राजनीतिक लाभ लेना तो दूर अपनी बात में ही कमजोर साबित हो रहे हैं। भाजपा टिकट मिलने के बाद रेवाड़ी उम्मीदवार लक्ष्मण यादव ने सामाजिक संगठनों की मीटिंग में इस मुद्दे का सबसे अहम बताते हुए सरकार बनने पर इस पर गंभीरता से अमल करने की बात कही थी लेकिन भाजपा घोषणा पत्र ने उन्हें भी किसी लायक नही छोड़ा।

इस पूरे मामले को इस  तरह से समझे

इस घोषणा पत्र में साफ तौर से बताया गया है की भाजपा सरकार आने पर मैट्रो परियोजना का विस्तार करते हुए इसे दिल्ली से धारूहेड़ा तक लाया जाएगा। जबकि बावल ओर धारूहेड़ा की जनता पिछले आठ माह से  एक सुर में एक बैनर की नीचे इस परियोजना को पहले चरण में बावल तक लाने के लिए सकारात्मक आंदोलन कर रही थी। भाजपा घोषणा पत्र इसे धारूहेड़ा तक बताकर यह साबित कर रहा है कि भाजपा संगठन, संबंधित विभाग ओर भाजपा के जिम्मेदार पदाधिकारी, विधायक, मंत्री ओर सांसद के बीच कोई तालमेल नही है। या इन्हें क्षेत्र की तस्वीर बदलने जा रहे इस सबसे बड़े प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नही है।   

लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह के हर  भाषण में मैट्रो को बावल तक लाने का वायदा किया जा रहा था। यहा से सभी छोटे बड़े भाजपा नेता,  विधायक एवं मंत्री लगातार राज्य सरकार एवं केंद्रीय मंत्रियों से मिल रहे थे। मीडिया भी उनके बयानों से भरा हुआ था की पहले चरण में मैट्रो बावल तक पहुंचेगी जिसमें कोई तकनीकी दिक्कत नही है। बावल तक तो हरियाणा सरकार की एजेंसी एचएसआईआईडीसी जमीन तक अधिग्रहण कर मुआवजा तक बांट चुकी है। इतना ही जहां से मैट्रो गुजरेगी वहां से मिटटी और बिजली लाइनों का कार्य भी तेजी से चल रहा था। इतना सबकुछ होने के बाद भी मैट्रो के नाम पर भाजपा नेताओं की असलियत खुद उनके घोषणा पत्र ने बता दी।

 सीधे तोर पर कांग्रेस को दो सीटों पर मिलेगा लाभ

 मैट्रो का सच सामने आते ही चुनाव में इसका सीधा फायदा कांग्रेस उम्मीदवारों को हो सकता है। इसकी प्रमुख यह परियोजना कांग्रेस सरकार के  समय में आई थी। कांग्रेस नेता ही इसे भाजपा सरकार में उठाते रहे हैं। स्थानीय भाजपा नेता, मंत्रियों को इतने बड़े प्रोजेक्ट की एबीसीडी तक नही पता था या वे जानना भी नही चाहते थे। सामाजिक संगठनों ने मोर्चा सें संभाला तो वे  हरकत में आए लेकिन उनके प्रयास महज मीडिया में बयानबाजी तक बनकर रह गए। रही सही कसर इस संकल्प पत्र के रूप में इस  घोषणा पत्र ने कर दी जिसमें भाजपा के अंदर बाहर कोई तालमेल नजर नही आ रहा है। जाहिर है इसका सीधा फायदा कांग्रेस उम्मीदवारों को सकता है।