यहां कांग्रेस आजाद नही, भाजपा बेलगाम, बाकी किसी की कोई कहानी नही

रणघोष खास. सुभाष चौधरी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में रेवाड़ी राजनीति के असल सच को अलग अलग दृष्टिकोण से समझना भी बहुत जरूरी है। यहां कांग्रेस सबसे ज्यादा ओर भाजपा कुछ समय तक राज करती आ रही है। इन दोनों ही दलों की अलग अलग खुबसूरती है। यहां कांग्रेस का मतलब कप्तान अजय सिंह यादव परिवार है। यहा कांग्रेस से ऐसा कोई नेता उभरकर सामने नही आया जो कप्तान से दो दो हाथ कर ले। लिहाजा एक लंबे समय से यहां कांग्रेस परिवारवाद  में पलती आ रही है जिसे असली आजादी नही कह सकते। उधर भाजपा में तस्वीर एकदम उलट है। यहा लीडरशिप करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन उतना ही बिखराव जन्म ले रहा है जिसका खामियाजा भाजपा 2014 से आज तक भुगत रही है। इसके अलावा इस चुनाव में किसी अन्य दलों के नेताओं की कोई कहानी नही है। रेवाड़ी कांग्रेस में कप्तान के सामने वही लंबे समय तक रह सकता है जो उसके मिजाज से कदमताल करता हो। इसलिए कप्तान जब तक इस सीट पर लड़ता रहा जब तक बेटा समझदार नही हो जाए। इसी तरह कप्तान के पिता स्व. राव अभय सिंह इस सीट को संभालते रहे। चिंरजीव भी इस परपंरा को आगे बढ़ाते हुए तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उनकी संतान इस पद के लिए तैयार नही हो जाए। जाहिर है राजनीति में यह कल्चर सीधे तोर पर राजशाही तंत्र की तस्वीर पेश करता है जो लोकतंत्र प्रणाली और संविधान में आम आदमी के अधिकार को अप्रत्यक्ष तोर  पर प्रभावित करता है। उधर भाजपा में राजनीति लोकतंत्र कांग्रेस के मुकाबले काफी बेहतर है। यहा हर किसी को बेहतर करने का अवसर मिलता है। इसलिए यहा गुटबाजी के बीच खुद को मजबूत करने की प्रतियोगिता चलती है। चुनाव में इसी तरह की मानसिकता भी विधायक बनाने या नही बनाने की सोच को प्रभावित करती है। इसलिए राजनीति के इस सच को समझना भी जरूरी है।