ब्लू स्पैरो मिसाइल: इजरायल का खतरनाक हथियार, जिससे ईरान के सुप्रीम लीडर को बनाया गया निशाना
मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है कि इजरायल ने ईरान पर हुए हमले में अपने सबसे खतरनाक हथियारों में से एक ब्लू स्पैरो मिसाइल का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei समेत कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों को निशाना बनाया गया।
बताया जा रहा है कि यह हमला बेहद गोपनीय और उच्च स्तरीय सैन्य ऑपरेशन के तहत किया गया था, जिसमें खुफिया जानकारी, निगरानी तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
28 फरवरी को हुआ बड़ा हमला
रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी की सुबह इजरायल ने तेहरान में एक बेहद सटीक सैन्य हमला किया। इस ऑपरेशन में Israel के लड़ाकू विमान मिशन पर भेजे गए।
हमले में शामिल विमानों में मुख्य रूप से F-15 fighter jet जैसे एडवांस फाइटर जेट थे। बताया जाता है कि सुबह लगभग साढ़े सात बजे विमान मिशन पर निकले और करीब दो घंटे बाद लक्ष्य पर मिसाइलें दागी गईं।
रिपोर्ट के अनुसार उस समय जिस परिसर को निशाना बनाया गया वहां ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारी मौजूद थे। हमले में कई महत्वपूर्ण ठिकाने भी तबाह हुए।
क्या है ब्लू स्पैरो मिसाइल
ब्लू स्पैरो एक अत्याधुनिक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे Israel ने विकसित किया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज गति और बैलिस्टिक उड़ान प्रणाली है, जिसकी वजह से इसे रोकना बेहद कठिन माना जाता है।
इस मिसाइल की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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मारक दूरी लगभग 2,000 किलोमीटर तक
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लंबाई करीब 6.5 मीटर
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वजन लगभग 1.9 टन
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लड़ाकू विमान से लॉन्च करने की क्षमता
ब्लू स्पैरो को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर लक्ष्य तक पहुंच सके।
‘मिसाइल फ्रॉम स्पेस’ क्यों कहा जाता है
ब्लू स्पैरो मिसाइल की उड़ान प्रणाली इसे अन्य मिसाइलों से अलग बनाती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह मिसाइल पहले पृथ्वी के वायुमंडल के बेहद करीब ऊंचाई तक पहुंचती है और फिर अत्यधिक गति से अपने लक्ष्य की ओर लौटती है। इसी वजह से इसे कई रक्षा विशेषज्ञ “मिसाइल फ्रॉम स्पेस” भी कहते हैं।
जब यह लक्ष्य के करीब पहुंचती है तो यह एक री-एंट्री व्हीकल छोड़ती है, जो अत्यधिक तेज गति से जमीन पर हमला करता है। इस वजह से इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन माना जाता है।
भारी एयर डिफेंस वाले क्षेत्रों में भी कारगर
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार स्पैरो मिसाइल सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लड़ाकू विमान दुश्मन के इलाके में प्रवेश किए बिना ही दूर से बैलिस्टिक स्टाइल का हमला कर सकें।
इसका फायदा यह होता है कि विमान सीधे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही हमला कर सकते हैं। यही कारण है कि इस मिसाइल का उपयोग खास तौर पर भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए किया जाता है।
खुफिया जानकारी के साथ किया गया ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान में हुआ यह हमला बेहद सटीक था, जिससे संकेत मिलता है कि ऑपरेशन से पहले लंबे समय तक खुफिया निगरानी की गई थी।
बताया जा रहा है कि जिस समय हमला हुआ उस समय परिसर में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारी मौजूद थे। यही वजह रही कि इस हमले को मिडिल-ईस्ट के हालिया इतिहास के सबसे सटीक सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।
मिडिल-ईस्ट में बढ़ा तनाव
ईरान पर हुए इस हमले के बाद पूरे मिडिल-ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है। कई देशों ने इस घटना को लेकर चिंता जताई है और आशंका जताई जा रही है कि इससे क्षेत्र में संघर्ष और अधिक भड़क सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस संघर्ष में और देश शामिल हुए तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।