दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल उस पोस्ट को फर्जी करार दिया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान हिंसा में एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी के बच्चे की पेट में ही मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वायरल पोस्ट को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है।
दिल्ली पुलिस ने एक्स पर वायरल पोस्ट शेयर करते हुए बयान में लिखा ‘जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी का गर्भस्थ शिशु खत्म हो गया। सोशल मीडिया पर चल रहे ये दावे पूरी तरह से झूठे और गुमराह करने वाले हैं। ये वायरल तस्वीरें तब ली गई थीं जब भगदड़ जैसी स्थिति में महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई थीं। तस्वीर में दिखाई गई महिला न तो शादीशुदा है और न ही गर्भवती है। फिलहाल वे मेडिकल देखरेख में हैं।
गोली चलाए जाने और पत्थर फेंकने के दावे भी फर्जी
दिल्ली पुलिस का यह ताजा स्पष्टीकरण जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कई भ्रामक दावों के बीच आया है। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को भी फर्जी करार दिया था जिसमें दावा किया जा रहा था कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के जवानों ने गोली चलाई और पत्थर फेंके। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो को गलत तरीके से जंतर-मंतर प्रदर्शन से जोड़ा गया है।
सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए एनएसए?
वहीं गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज किया जिसमें दावा किया गया जा रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत अतिरिक्त शक्तियां (हिरासत में लेने) दी गई हैं।दिल्ली पुलिस ने बताया कि हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि एनएसए के तहत हर तीन महीने में शक्तियों के रिन्यूअल की प्रक्रिया होती है जो कि एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। मौजूदा रिन्यूअल का आदेश 7 जुलाई 2026 को जारी किया गया जिसकी समय अवधि 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 है यानी सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से काफी पहले। हाल में जारी विरोध प्रदर्शन के संबंध में कोई विशेष आवेदन और आदेश जारी नहीं किया गया है।