क्या होता है ‘गोइंग डार्क’? जिसका इस्तेमाल कर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल भारत पहुंचा जहाज
पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। इसी बीच सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ एक जहाज खतरनाक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलकर मुंबई पहुंच गया। इस जहाज ने खतरे वाले इलाके से गुजरते समय अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया था। समुद्री भाषा में इस तकनीक को “गोइंग डार्क” (Going Dark) कहा जाता है।
इस घटना ने आम लोगों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर “गोइंग डार्क” क्या होता है और जहाज ऐसा क्यों करते हैं।
क्या होता है ‘Going Dark’?
समुद्री जहाजों में एक खास ट्रैकिंग तकनीक होती है जिसे AIS (Automatic Identification System) कहा जाता है। यह सिस्टम जहाज की पहचान, लोकेशन, दिशा और गति की जानकारी लगातार प्रसारित करता रहता है, जिससे दूसरे जहाज, बंदरगाह और सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों को ट्रैक कर सकें।
लेकिन जब कोई जहाज जानबूझकर अपना AIS ट्रांसमीटर बंद कर देता है, तब वह सार्वजनिक ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो जाता है। इसी स्थिति को समुद्री शब्दावली में “Going Dark” कहा जाता है।
सरल भाषा में समझें तो जहाज का डिजिटल निशान गायब हो जाना ही “गोइंग डार्क” है।
जहाज क्यों करते हैं ‘गोइंग डार्क’?
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार जहाजों के लिए AIS चालू रखना जरूरी होता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में कप्तान इसे बंद कर सकता है।
मुख्य कारण ये होते हैं:
1. युद्ध या हमले से बचने के लिए
जब किसी समुद्री क्षेत्र में युद्ध या हमले का खतरा होता है, तो जहाज अपनी लोकेशन छिपाने के लिए AIS बंद कर देते हैं ताकि दुश्मन उन्हें ट्रैक न कर सके।
2. समुद्री डकैती या ड्रोन हमलों का खतरा
खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में कई बार जहाजों पर ड्रोन या मिसाइल हमले हुए हैं। ऐसे में जहाज “गोइंग डार्क” होकर सुरक्षित निकलने की कोशिश करते हैं।
3. संवेदनशील या खतरनाक समुद्री रास्ते
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है, इसलिए जहाज कई बार अपनी पहचान छिपाकर गुजरते हैं।
भारत पहुंचा जहाज कैसे हुआ ‘गायब’?
रिपोर्ट के अनुसार लाइबेरिया के झंडे वाला शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स नाम का तेल टैंकर 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से रवाना हुआ था।
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जहाज ने लगभग 1.35 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लोड किया था।
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8 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट के पास इसका आखिरी सिग्नल मिला।
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इसके बाद जहाज ट्रैकिंग सिस्टम से अचानक गायब हो गया।
यह संकेत था कि जहाज के क्रू ने खतरे वाले इलाके में AIS बंद कर दिया, यानी जहाज “गोइंग डार्क” हो गया।
कुछ समय बाद यह जहाज सुरक्षित रूप से मुंबई के जवाहर द्वीप टर्मिनल पहुंच गया, जहां उसका तेल उतारा जा रहा है।
जहाज में कौन-कौन थे?
अधिकारियों के मुताबिक इस जहाज में कुल 29 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के नाविक शामिल थे। जहाज के कप्तान कैप्टन सुक्षांत सिंह संधू बताए गए हैं।
खतरा अभी भी टला नहीं
जहां एक जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया, वहीं सऊदी अरब से कांडला पोर्ट आ रहे मयूरी नारी नाम के जहाज पर हमले की खबर भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्टाइल हमले के बाद जहाज में आग लग गई और तीन क्रू सदस्य लापता हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है।
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दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है
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खाड़ी देशों से एशिया और यूरोप तक तेल पहुंचाने का यह मुख्य मार्ग है
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इसलिए यहां युद्ध या तनाव होने पर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो जाती है
भारत के लिए क्या मायने?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि होर्मुज स्ट्रेट में संकट बढ़ता है तो इसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि देश में फिलहाल तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है।