“संयम भूल जाएंगे, खून बहा देंगे…” ईरानी संसद स्पीकर की अमेरिका को खुली चेतावनी, फारस की खाड़ी में बढ़ा तनाव
मध्य-पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को तीखी चेतावनी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा है कि यदि फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर हमला किया गया तो ईरान संयम भूल जाएगा और जवाब इतना कड़ा होगा कि फारस की खाड़ी हमलावरों के खून से भर जाएगी।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है और खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर दी कड़ी चेतावनी
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अमेरिका को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भी ईरान के द्वीपों को निशाना बनाया तो इसका जवाब बेहद कठोर होगा।
यह बयान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच आया है, जहां पिछले कुछ दिनों में जहाजों और तेल टैंकरों पर कई हमले हुए हैं।
तेल टैंकरों पर लगातार हमले
खाड़ी क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने इराकी तट के पास दो विदेशी तेल टैंकरों पर हमला किया है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
ब्रिटेन की मैरीटाइम एजेंसी ने भी पुष्टि की है कि फारस की खाड़ी में एक और जहाज पर हमला हुआ है। पिछले दो दिनों में यह छठा हमला बताया जा रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ईरान के द्वीप?
फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के कई द्वीप रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप, जो ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनलों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात किया जाता है।
इसके अलावा कुछ द्वीपों पर ईरान के सैन्य अड्डे भी मौजूद हैं, जिससे इनकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
विवादित द्वीप बने तनाव का केंद्र
फारस की खाड़ी में स्थित अबू मूसा और ग्रेटर टुंब द्वीप लंबे समय से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विवाद का कारण बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो भी इन द्वीपों पर नियंत्रण रखता है, वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मजबूत पकड़ बना सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा है पूरा मामला
इन द्वीपों के पास ही दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य स्थित है। यह मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि यहां संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फारस की खाड़ी में तनाव और बढ़ता है तो इससे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ता यह संकट केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।