India-US Trade Deal: रूस से तेल खरीद बंद करेगा भारत? समझौते के बाद ऊर्जा क्षेत्र में हलचल
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। इस समझौते के तहत भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने और बदले में अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है।
हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों का कहना है कि रूसी तेल के आयात को पूरी तरह रोकने के लिए उन्हें समय चाहिए होगा ताकि नई व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाया जा सके। फरवरी में बुक किए गए रूसी तेल के कई कार्गो मार्च में भारत पहुंचने वाले हैं और सरकार की ओर से अभी तक आयात रोकने का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
समझौते की मुख्य शर्तें और संभावित असर
सोमवार को घोषित इस व्यापार सौदे का केंद्र टैरिफ और ऊर्जा नीति है। अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क को 50% से घटाकर 18% करेगा। इसके बदले भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में कदम उठाने होंगे।
इस बदलाव के बाद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल खरीद सकता है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की रणनीति को नई दिशा दे सकता है।
रिफाइनरों के सामने चुनौतियां
रॉयटर्स के हवाले से रिफाइनिंग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सरकार की ओर से अभी तक कोई लिखित निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में कंपनियों के सामने कई तकनीकी और व्यापारिक अड़चनें मौजूद हैं।
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भारतीय कंपनियां पहले ही फरवरी में लोड होने वाले और मार्च में पहुंचने वाले कार्गो बुक कर चुकी हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए समय लगेगा।
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रूस समर्थित नयारा एनर्जी की रिफाइनरी, जिसकी क्षमता करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन है, लगभग पूरी तरह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है क्योंकि इराक और सऊदी अरब पहले ही आपूर्ति घटा चुके हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, नयारा अप्रैल में मेंटेनेंस के लिए अपनी रिफाइनरी बंद करेगी, जिससे उस दौरान रूसी तेल का आयात स्वतः शून्य हो सकता है।
रूसी तेल पर पीएम मोदी का सीधा बयान नहीं
2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। अमेरिका का उद्देश्य रूस के राजस्व को कम करना है ताकि युद्ध के लिए उसकी फंडिंग सीमित की जा सके।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई और भारत रूसी तेल पर निर्भरता कम करने को तैयार है।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर टैरिफ कम होने पर खुशी जाहिर की, लेकिन रूसी तेल आयात बंद करने के विषय पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की।
बदल रही है भारत की ऊर्जा रणनीति
भारत पहले से ही अपनी तेल आपूर्ति में विविधता लाने की दिशा में कदम उठा रहा है। पिछले दो वर्षों में दिसंबर के दौरान रूसी तेल का आयात सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि भारतीय आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंची।
अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि भारत रूसी तेल की कमी को पूरा करने के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है।
अवसर और चुनौती दोनों
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता एक तरफ अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए सस्ता प्रवेश सुनिश्चित कर सकता है, वहीं दूसरी ओर भारत को अपनी रिफाइनरियों के लिए नए और स्थायी ऊर्जा स्रोत तलाशने की चुनौती भी देगा।
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि भारत सरकार किस तरह रूसी तेल पर अपनी निर्भरता को कम करती है और नई ऊर्जा साझेदारियों को मजबूत बनाती है।