NEET में पहले 400 और फिर 570 अंक, पर नहीं मिला MBBS, फिर एक साथ 5 सरकारी नौकरियों में चयन

मध्य प्रदेश के शहडोल की रहने वाली शुभांगी मिश्रा की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो किसी एक परीक्षा में असफल होने के बाद अपना आत्मविश्वास खो देते हैं और निराश हताश होकर बैठ जाते हैं। शुभांगी इस बात की भी शानदार मिसाल है कि अगर आप मेहनती है तो करियर में फील्ड बदलकर भी कामयाब हुआ जा सकता है। इसमें हिचकिचाना नहीं चाहिए। शुभांगी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी दो बार दी। 12वीं के बाद एक साल का ड्रॉप लेकर नीट का पहला प्रयास दिया जिसमें उन्हें 400 अंक मिले। एक और ड्रॉप ईयर लिया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 570 अंक हासिल किए। तीन साल तक लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल पाया। बीडीएस मिल रहा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना लक्ष्य बदला और सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। आज महज 21 साल की उम्र में शुभांगी का चयन पांच सरकारी नौकरियों में हो चुका है। इनमें शामिल हैं— एमपी पुलिस कांस्टेबल, एसएससी स्टेनोग्राफ, मध्य प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI-स्टेनो), एमपी पुलिस सूबेदार।

हिंदी मीडियम से पढ़ी, लेकिन परीक्षा इंग्लिश मीडियम में दी

शुभांगी मिश्रा उमरिया के शाहपुर गांव की रहने वाली है, जो की शहडोल जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर है। उनके पिता श्याम कुमार मिश्रा मध्य प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और मां सुनीता मिश्रा हाउसवाइफ हैं। शुभांगी ने अपनी स्कूली शिक्षा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, शहडोल से पूरी की। 12वीं के बाद कोविड काल में उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी के जरिए NEET की तैयारी शुरू की। उन्होंने स्कूलिंग हिंदी मीडियम से की थी। लेकिन नीट यूजी की तैयारी इंग्लिश मीडियम में की। पहले प्रयास में 400 अंक आने के बाद उन्होंने एक और साल ड्रॉप लिया। दूसरे प्रयास में 570 अंक हासिल किए, लेकिन फिर भी एमबीबीएस में सीट नहीं मिली।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे प्रयास के दौरान उन्होंने एमपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा भी दी। केवल दो महीने की तैयारी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। हालांकि पहली बार कुछ अंकों से चयन नहीं हो पाया, लेकिन इसी परीक्षा ने उन्हें यह भरोसा दिला दिया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकती हैं। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह सरकारी नौकरी की तैयारी पर फोकस कर दिया। रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और लगातार एक के बाद एक परीक्षाएं पास करती चली गईं।

फिलहाल शुभांगी एमपी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर चयनित हैं। जबलपुर में ट्रेनिंग के दौरान ही उनका चयन एसएससी स्टेनोग्राफर, एमपी पुलिस एसआई, एएसआई (स्टेनो) और सूबेदार जैसे पदों पर भी हो गया।

यूपीएससी क्रैक करना है टारगेट

हालांकि कई नौकरियों में चयन के बावजूद उनका अंतिम लक्ष्य अभी भी सिविल सर्विसेज है। वे आज भी रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती हैं और यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई हैं।

सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी

शुभांगी की कहानी खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को संदेश देती हैं कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में सबसे बड़ी बाधा नहीं होते। सबसे जरूरी है अपने लक्ष्य पर विश्वास और लगातार मेहनत। शुभांगी के पिता बताते हैं कि शुभांगी ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई। वह मोबाइल का इस्तेमाल केवल पढ़ाई के लिए करती थीं और यही उनकी सफलता का एक बड़ा कारण रहा।

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