मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। जनरल चौहान के मुताबिक, चार दिनों तक चले इस सैन्य टकराव के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर जंग रोकने की गुहार लगाई थी, तब भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने तय प्लान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था। भारत ने पाकिस्तान की इस मांग को तुरंत स्वीकार न करते हुए उसे घंटों इंतजार में रखा, ताकि नियोजित ठिकानों पर हमले पूरे किए जा सकें।
‘द प्रिंट’ के कार्यक्रम में बातचीत के दौरान जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने डायरेक्टर्स जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) की हॉटलाइन पर भारत से संपर्क किया था।
पूर्व सीडीएस ने बताया कि भारत अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध था। पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश देना जरूरी था कि उसका कोई भी सैन्य ठिकाना भारतीय सेना की पहुंच से बाहर नहीं है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान को दोपहर तक इंतजार कराया गया और इस दौरान भारतीय वायुसेना की तरफ से नियोजित हमलों की अगली लहर को अंजाम दिया गया।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद पाकिस्तान और पीओके में फल-फूल रहे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को जमींदोज करना था।
9 मई की रात और 10 मई के तड़के भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर जिस तरह तबाही मचाई, उसने इस्लामाबाद के होश उड़ा दिए। पाकिस्तान को लगा कि उसके हमलों का जवाब भारत और अधिक आक्रामक तरीके से देगा, जिससे स्थिति उसके हाथ से निकल जाएगी। इसी डर के कारण उसने आनन-फानन में डीजीएमओ हॉटलाइन पर सीजफायर की गुहार लगाई। आखिरकार 10 मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी।
जनरल चौहान ने भारतीय सेना की उस तकनीकी और रणनीतिक बढ़त पर भी प्रकाश डाला जिसने इस संघर्ष में भारत का पलड़ा भारी रखा।
पूर्व सीडीएस ने कहा कि युद्ध के दौरान हमारे कमांडरों के पास दुश्मन के मुकाबले युद्धक्षेत्र की ज्यादा स्पष्ट और तेज जानकारी थी।
भारतीय सेना को इस बात की पल-पल की खबर थी कि हमारे हमलों से पाकिस्तान को कितना नुकसान हुआ है और उनके हमलों का क्या असर पड़ा है।
सभी कमान अधिकारी एक ही रियल-टाइम तस्वीर देख रहे थे, जिससे फैसले बेहद तेजी से लिए गए। युद्ध में तेजी से फैसले लेना ही दुश्मन को बैकफुट पर धकेलता है और भारत ऐसा करने में पूरी तरह सफल रहा।