नीतीश कुमार के 10 बड़े फैसले: जिनसे बदली बिहार की तस्वीर, कई राज्यों ने भी अपनाया मॉडल
Nitish Kumar के नेतृत्व में Bihar में पिछले दो दशकों के दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए, जिन्होंने राज्य की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया।
मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में महिलाओं के सशक्तीकरण, कानून व्यवस्था सुधार, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान और गरीब वर्ग के उत्थान को लेकर कई योजनाएं लागू की गईं। इन पहलों की सराहना देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हुई और कई राज्यों ने इन मॉडलों को अपनाया।
आइए जानते हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ऐसे 10 बड़े फैसलों के बारे में, जिन्होंने बिहार की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई।
1. पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण
नीतीश सरकार ने देश में पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया।
इस फैसले से स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी और आज बिहार में पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। बाद में Maharashtra, Rajasthan, Kerala, Jharkhand सहित कई राज्यों ने इस मॉडल को अपनाया।
2. नौकरी और पढ़ाई में महिलाओं को 35% आरक्षण
साल 2013 में बिहार पुलिस में 35 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप आज बिहार पुलिस में करीब 30 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं और उनकी संख्या 31 हजार से अधिक हो चुकी है।
2016 से राज्य की सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू किया गया।
3. जीविका योजना से लाखों महिलाओं को रोजगार
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 2006 में जीविका योजना की शुरुआत की गई।
आज इस योजना से 1.40 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और लगभग 11 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इस मॉडल से प्रेरित होकर केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर आजीविका मिशन को आगे बढ़ाया।
4. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई।
इस योजना के तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने की भी व्यवस्था है।
5. कन्या उत्थान और जननी बाल सुरक्षा योजना
स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
कन्या उत्थान योजना के जरिए जन्म पंजीकरण में बड़ी बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला।
जहां पहले केवल 4 प्रतिशत महिलाएं अस्पताल में प्रसव कराती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
6. बिहार में पूर्ण शराबबंदी
अप्रैल 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई और 2 अक्टूबर 2016 से नया मद्य निषेध कानून लागू किया गया।
सरकार के अनुसार इस फैसले से घरेलू हिंसा में 35–40 प्रतिशत तक कमी आई और परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिला।
7. कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार
2005 के बाद बिहार में अपराध नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग की नीति अपनाई गई।
इससे राज्य की छवि में बड़ा बदलाव आया और लंबे समय से सक्रिय कई बाहुबलियों पर कार्रवाई हुई। आम नागरिकों में भी सुरक्षा का भरोसा बढ़ा।
8. बाल विवाह और दहेज के खिलाफ अभियान
2017 में राज्य स्तर पर बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया गया।
करीब ढाई करोड़ लोगों ने इन कुरीतियों को खत्म करने की शपथ ली। इस अभियान का असर यह हुआ कि राज्य में बाल विवाह की दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
9. पिछड़ा वर्ग साक्षरता अभियान
2009-10 में अक्षर अंचल योजना शुरू की गई, जिसके तहत 67 लाख से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया गया।
बाद में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया, जिससे बिहार में महिला साक्षरता दर में तेज बढ़ोतरी हुई।
10. हुनर और औजार कार्यक्रम
अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘हुनर’ और ‘औजार’ कार्यक्रम शुरू किए गए।
इन योजनाओं के तहत हजारों लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया और फिर उन्हें टूलकिट उपलब्ध कराई गई, ताकि वे खुद का काम शुरू कर सकें।
इन फैसलों के कारण बिहार में सामाजिक विकास, महिला सशक्तीकरण और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। यही वजह है कि आज कई राज्य बिहार के इन मॉडलों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।