भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए इसके ऊपर से लगे आयात शुल्क को हटा दिया है। नई दिल्ली सरकार के इस फैसले के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान के चीनी मिल मालिकों में एक आशा की लहर है। उन्होंने अपनी सरकार से इस बात की गुहार लगाना शुरू कर दिया है कि किसी भी तरीके से अतिरिक्त चीनी स्टॉक को भारत में निर्यात करने की व्यवस्था की जाए। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार बंद है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तानी चीनी मिल मालिकों को उम्मीद है कि पाकिस्तानी सरकार किसी दूसरे माध्यम से इस मुद्दे पर काम कर सकती है।
पाकिस्तानी अखबरा ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली द्वारा चीनी के ऊपर से आयात शुल्क हटाने के बाद पाकिस्तान में एक आशा की लहर दौड़ गई है। रिपोर्ट में पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोशिएशन के एक सदस्य का हवाला देते हुए बताया कि गया है कि चीनी उद्योग ने सरकार से चीनी निर्यात के लिए भारत को एक बाजार बनाने की संभावना तलाशने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार बंद है। लेकिन इसके बाद भी किसी तीसरे विकल्प पर बात की जा सकती है।
भारत के बाजार को उम्मीद की नजरों से देख रहा पाकिस्तान
नई दिल्ली की तरफ से चीनी आयात पर से हटाए गए आयात शुल्क की वजह से पाकिस्तानी चीनी मिलों को अपने बिगड़े हुए आर्थिक ढांचे में सुधार के अवसर नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की हुंजा शुगर मिल्स लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी मुहम्मद वहीद ने कहा कि पाकिस्तान के पास चीनी का एक अतिरिक्त स्टॉक रखा हुआ है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के पास वर्तमान में 1.2 मिलियन टन से ज्यादा का चीनी स्टॉक है। इससे अगली पेराई का वक्त नजदीक आने की वजह से दबाव बढ़ रहा है। चीनी उद्योग को डर है कि अगर अगले सीजन में बंपर फसल होती है और स्टॉक और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। ऐसे में मिलों के पास किसानों के देने के लिए पैसा नहीं होगा।” वहीद के मुताबिक इस स्थिति से बचने के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए और भारत की तरफ से आए इस मौके को भुनाना चाहिए।
भारत में निर्यात करने से आएगी विदेशी मुद्रा
लगातार बढ़ते स्टॉक से आर्थिक समस्या का सामना कर रहे पाकिस्तानी चीनी मिलों के मालिकों ने भारत की तरफ से आए इस मौके का फायदा उठाने की अपील की है। वहीद ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी माल ढुलाई आसान हो सकती है। अगर सीधा भी नहीं तो किसी तीसरे स्थान के जरिए भी यह काम की रहेगी। भारत को चीनी निर्यात करने से विदेशी मुद्रा आ सकती है। इससे मिलों को फायदा होगा और किसानों को भी अगली फसल पर जल्दी से नकदी भुगतान किया जा सकेगा।”
हालांकि पाकिस्तान का चीनी मिल्स एसोशिएसन ने भारत के साथ किसी व्यापार समझौते पर बात करने को नहीं बल्कि केवल एक विकल्प तलाशने को कहा है। इससे केवल इसी निर्यात के लिए रास्ते खोले जा सकें। फिलहाल इस मामले पर भारत और पाकिस्तान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भारत सरकार ने चीनी पर से हटाया आयात शुल्क
पाकिस्तान की तरफ से यह रिपोर्ट भारत सरकार के उस फैसले के बाद सामने आई है, जिसमें नई दिल्ली ने विदेशी चीनी आयात पर से आयात शुल्क हटाने का फैसला लिया है। इसका सबसे बड़ा कारण चीनी के बढ़ते दामों को बताया जा रहा है।
इंडस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक 18 अगस्त को पूरे भारत में चीनी की औसत एक्स मिल कीमत बढकर 4,000 से 5,500 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। वहीं, पिछले साल यह कीमत केवल 3,900 रुपए प्रति क्विंटल थी।
सरकार ने सट्टेबाजी और जमाखोरी के दिए संकेत- भारत सरकार की तरफ से आयात शुल्क को हटाने के पीछे जमाखोरी और सट्टेबाजी को वजह बताया गया है। सरकार ने इसे रोकने के लिए स्टॉक रखने पर भी पाबंदी लगाई है। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि चीनी की बढ़ती कीमतें पूरी तरह से मांग और आपूर्ति पर आधारित नहीं है। बल्कि इसके पीछे जमाखोरी भी एक कारण है। सरकार ने इसी जमाखोरी को रोकने और शक्कर की कीमतों को स्थाई रखने के लिए चीनी से आयात शुल्क हटाया है।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा चीनी के आयात से शुल्क हटाने का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में पहले से ही इथेनॉल के प्रयोग को लेकर बवाल मचा हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि इथेनॉल के प्रयोग से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं। अब, जबकि चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आयात पर जोर दिया गया है, तब विपक्ष ने इसे सरकार में दूरदर्शिता की कमी बताया। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि गन्ने के उत्पाद को इथेनॉल उद्योग की तरफ मोड़ने की वजह से चीनी उद्योग को कमी का सामना करना पड़ा है। इसलिए सर प्लस वाले चीनी उद्योग भी भारत की मांग को पूरी नहीं कर पा रहे हैं और देश के करीब 10 मिलियन टन चीनी का आयात करना पड़ रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त चीनी मौजूद है। केवल जमाखोरी को रोकने और कीमतों को स्थाई रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।