रणघोष खास. मतदाता की कलम से
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा संगठन में बाजारू कार्यकर्ताओं की भी अच्छी खासी फौज बन गई है जिसका मूल चरित्र चुनाव में साफ तोर से नजर आ रहा है। हर सीट पर जीत को सुनिश्चित करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। छोटे कार्यकर्ता से लेकर बड़े पदों पर आसीन पदाधिकारी की सोच अर्थ के रास्ते अपना हित साधते हुए मौका लगते ही लूट की मची हुई है। यही वजह है की इनके कार्यकर्ता उद्योगपतियों से चंदा वसूली के लिए फोन कर रहे हैं तो कही सरकार आने पर दबी फाइलों को अमल में लाने का सौदा हो रहा है। भाजपा पदाधिकारी अलग अलग खर्चों के नाम पर उम्मीदवारों ओर शीर्ष नेतृत्व के पास डिमांड भेज रहे हैं। चुनाव में भाजपा एक साथ कई चेहरों में नजर आ रही है। ड्राईंग रूम में उसकी रणनीति अलग होती है। जनता के सामने वह अलग किरदार में दिख रही है और गुप्त मीटिंग की आड में अलग खेल हो रहा है। यह स्थिति कांग्रेस ओर अन्य दलों में भी है लेकिन भाजपा के मुकाबले बहुत कम है। कांग्रेस में व्यक्ति विशेष इस पूरे खेल को अपने दम पर संभालता है जबकि भाजपा में अलग अलग प्लेटफार्म बने हुए हैं। चंडीगढ़ में बैठी टीम अलग तरीके से सिस्टम कौ मैनेज कर रही है। दिल्ली से अलग तरह का संचालन चल रहा है ओर जिला स्तर पर भाजपा जिला टीम अपने रसूक और प्रभाव से मीडिया से लेकर आमजन की हैसियत पर बोली लगाकर विश्वास में ले रही है। कहने को राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र को ताकत बनाकर जनता से वोट मांग रहे हैं जबकि असलियत में वे सबसे पहले चुनाव में समाज को जाति- धर्म के नाम पर बांटते है। अब तो गौत्र तक वोटों का गणित तैयार हो रहा है। उसके बाद वोटों के खरीदने का टेंडर छोड़ा जाता है। कुछ सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार इस मामले में मास्टर है तो बची जगहों पर भाजपाईयों को ट्रेनिंग देकर भेजा जा रहा है। भाजपा विचारधारा से जुड़े अन्य संगठन भी बिना शोर मचाए इस मिशन में जुटे हुए हैं। कुल मिलाकर चुनाव में विचारधारा किसी कोने में दुबकी नजर आ रही है ओर वोट वसूलने का खेल सरेआम अपना तांडव कर रहा है।