मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते हुए एकदम सामान्य दिख रहे जगदीप धनखड़ ने दिन खत्म होने से पहले इस्तीफा दे दिया। रात को अचानक एक्स पर इस्तीफे का ऐलान किया और बिना किसी अपॉइंटमेंट के ही राष्ट्रपति भवन पहुंचकर त्यागपत्र सौंप आए। इसके बाद पूरी रात चुप्पी रही और मंगलवार को लगभग दोपहर में पीएम नरेंद्र मोदी महज तीन लाइन की एक पोस्ट एक्स पर लिखी। उन्होंने लिखा, ‘श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।’
इस तरह करीब 15 घंटे बाद पीएम नरेंद्र मोदी का रिएक्शन आया। इससे पहले उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। लेकिन इस मसले पर उनकी ओर से कोई बयान नहीं आया। यही नहीं नितिन गडकरी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण समेत तमाम वरिष्ठ मंत्री भी चुप रहे। सोशल मीडिया से लेकर प्रत्यक्ष तौर पर भी किसी तरह का संदेश जारी नहीं किया गया। रवि किशन जैसे तीसरी पंक्ति के नेता ही बाइट देते नजर आए और कहा कि किसी के स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष को राजनीति नहीं करनी चाहिए। हालांकि जानकार मानते हैं कि सरकार के शीर्ष नेताओं की चुप्पी में ही इस्तीफे का शोर कहीं छिपा है।
यदि उनका इस्तीफा सामान्य कारण से होता तो उनके लिए एक अच्छा विदाई संदेश जरूर आता। इसके अलावा विपक्ष की आलोचनाओं पर भी कोई सीनियर नेता जवाब देता। यही नहीं खुद जगदीप धनखड़ ही राज्यसभा जाते और फेयरवेल स्पीच देकर अपने कार्यकाल का समापन करते। हालांकि इस बीच चर्चाएं हैं कि विपक्ष की ओर से जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने से सरकार असहज थी। सरकार चाहती थी कि विपक्ष के प्रस्ताव को इतनी जल्दी ना स्वीकार किया जाए। इससे सरकार को न्यायपालिका के खिलाफ आक्रामक होकर खेलने का मौका नहीं मिल पाया।
इस्तीफे की इस थ्योरी पर चल रही है सबसे ज्यादा चर्चा
इस चर्चा के पीछे दलील यह है कि विपक्ष का प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ही जो मीटिंग थी, उसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू नहीं पहुंचे। इसके अलावा जगदीप धनखड़ को एक फोन आने की बात भी चल रही है। कहा जा रहा है कि इस तरह फोन पर विपक्ष के प्रस्ताव स्वीकार करने पर आपत्ति जताए जाने और फिर मंत्रियों के ना पहुंचने से वह अपमानित महसूस कर रहे थे। अंत में उन्होंने पद से इस्तीफा ही दे दिया। मजाकिया अंदाज के लिए चर्चित रहे जगदीप धनखड़ अपने सख्त तेवरों के लिए भी जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि सरकार के ऐतराज पर उन्होंने भी तेवर ही दिखाए और सोमवार रात को अचानक इस्तीफा दे दिया।