सीधी सपाट : हमें माफ करना बेटी, देश में शिक्षा अब बाजार में अपनी बोली लगवाती है

हद है एग्जाम सेंटर पर मंगलसूत्र, चूड़ियां, चोटी के रबर से खतरा, पेपर की गारंटी नही


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

रविवार को सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) की परीक्षा देने रविवार को अभ्यर्थी पहुंचे। जहां पर सेंटर के बाहर परीक्षा देने आए महिलाओं और पुरुषों की ज्वेलरी और रक्षा धागे उतरवा दिए गए। शादीशुदा महिलाओं के मंगलसूत्र, चूड़ी, बिछिया कान के टॉप्स और बालों से क्लिप निकलवा दी गई। वहीं, पुरुषों के हाथों में बंधे रक्षा सूत्र को कैंची से काट दिया गया। सेंटर पर ऐसा होता देख पेपर देने आए लोगों में जबरादस्त नाराजगी है। परीक्षार्थियों के साथ परिजनों का कहना है की जिस तरीके से तलाशी ली जा रही है और लाज लज्जा, पहनावा, संस्कृति की अस्मिता से खेला जाता रहा है। ऐसा लग रहा है हम देश के नागरिक नही होकर कोई आतंकवादी है। एग्जाम को लेकर नीति बनाने वाले पहले अपने गिरेबां में झांके और उन लाखों बच्चो के सामने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे जिसकी वजह से पेपर लीक हो जाते हैं ओर युवाओं का भविष्य खतरे में चला जाता है। सीटैट परीक्षा में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा होती है। हद उस समय हो गई जब पेंट टी शर्ट  पहनकर आने वाली बेटियों की पेंट से बैल्ट तक उतरवा ली गईं। तलाशी के नाम पर आने वाले परीक्षार्थी को एक तरह मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।   

चूड़ी उतारकर सेंटर के बाहर फेंक दी

कुछ जगहों पर पेपर के लिए लेट होने पर वो अपना सारा सामान उतार कर परिजनों को देकर एग्जाम हॉल में चले गए। वहीं जो महिलाएं अकेले आई थीं, उन लोगों ने चूड़ी उतारकर सेंटर के बाहर फेंक दी और सोने का सामान सेंटर पर चेकिंग कर रही महिलाओं को दे दिया। पुरुषों ने भी रक्षा सूत्र या कलावा उतारकर सेंटर के बाहर ही फेंक दिया। वहीं कुछ महिलाएं परीक्षा छोड़कर वापस लौट गई। हालांकि परीक्षा देने आए अभ्यार्थियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा, ये सनातन संस्कृति के साथ खिलवाड़ है।

 हमारे एडमिट कार्ड में ऐसा कहीं नहीं लिखा
 परीक्षा देने आई एक महिला ने बताया, यहां पर चेकिंग के दौरान हमारा सारा सामान उतरवा लिया गया। हमारे बाल का क्लेचर निकाल लिया गया। हम तो अपने पति के साथ आए थे तो सारा सामान उनको दे दिए। कई महिलाएं तो वापस लौट गई हैं। पेपर ऑफ लाइन है, उसके बाद भी हमसे सारा सामान ले लिया गया। ये तो गलत बात है। हमारे एडमिट कार्ड में भी ऐसा कहीं नहीं लिखा है।

सामान चोरी होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी?
 वहीं एक पुरुष अभ्यर्थी ने बताया, जिले में अन्य कई सेंटरों पर यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। वहां पर इस तरीके की कोई भी चेकिंग नहीं की जा रही है। जबकि दिल्ली पब्लिक स्कूल में हमारा सारा सामान ले लिया गया। अगर हमारा सामान चोरी हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

 यह हमारी परम्परा के साथ खिलवाड़ है
 वहीं बेटी के साथ एक पिता का  कहना है, शादी के बाद बेटियां मंगलसूत्र, बिछिया, चूड़ी नहीं उतारती हैं। यह हमारी परम्परा के साथ खिलवाड़ है। बच्चों ने कई परीक्षा दी हैं कभी इस तरह से चेकिंग नही की गई। हमें अपनी बेटी को ऐसी परीक्षा नही दिलवाना है।

  सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टी की हो रही छवि खराब

परीक्षा केंद्रों पर इस तरह की  तलाशी से फैलते रोष से सरकार चला रही राजनीतिक पार्टियों को नुकसान हो रहा है। चैंकिंग करना समझ में आता है लेकिन उसकी आड में मानसिक प्रताड़ना देना सीधे तौर पर बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।