नीट पेपर लीक के मुद्दे पर 26 दिनों तक अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सरकार के बीच क्या किसी कांग्रेस सांसद ने समझौता कराया था? इस तरह की चर्चाओं पर अब खुद वांगचुक ने विराम लगा दिया है। उन्होंने इस बात को अफवाह करार देते हुए बताया कि कैसे सरकार के साथ उनकी बातचीत शुरू हुई और अंजाम तक पहुंची।
सोनम वांगचुक ने ‘द वीक’ मैगजीन को दिए इंटरव्यू में आंदोलन से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद छोड़ने और दो अन्य मांगों को मनवाने की कहानी बताने से पहले समझौते को लेकर फैली अफवाह को खत्म किया। सरकार की ओर से दबाव बनाए जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में वांगचुक ने कहा, ‘ ना सिर्फ यह कि सरकार का दबाव था, बल्कि यह अफवाह भी है कि कुछ कांग्रेसी सांसदों ने मेरे और सरकार के बीच समझौता कराया। इनसे अधिक निराधार कुछ नहीं हो सकता है।’
सरकार पर था दबाव: वांगचुक
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि दबाव था तो सिर्फ उनका, वह भी सरकार पर। उन्होंने कहा, ‘ऐसी कोई वजह नहीं थी कि सरकार मुझ पर दबाव डाले। जब जंतर-मंतर से मुझे बलपूर्वक उठाकर अस्पताल ले जाया गया तो आंदोलन बड़ा हो गया और 20 जुलाई को मार्च के बाद सरकार असली दबाव में आई।’
फिर कैसे हुई सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत
वांगचुक ने बताया कि उनके और सरकार के बीच पुल का काम किसी राजनीतिक दल ने नहीं बल्कि खुफिया एंजेंसियों के लोगों ने किया। उन्होंने कहा, ‘मुझसे किसी राजनीतिक दल के जरिए नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के जरिए संपर्क किया गया और उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। सफदरजंग और मेदांता अस्पताल के बाहर बहुत ज्यादा सुरक्षा थी, आईबी के अधिकारी मेरे पास विनम्रता के साथ संदेश लेकर आते थे कि क्या मैं कुछ निश्चित लोगों से बात करूंगा। मैंने कहा कि मैं किसी से भी बात करने को तैयार हूं। तब उन्होंने मुझे कहा कि दो मंत्री आ रहे हैं और मैं सहमत हुआ।’
मंत्रियों से दो मुलाकातों के बाद सहमति तक पहुंचे
सोनम वांगचुक ने उनके और सरकार के बीच हुए बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दो बार उनकी केंद्रीय मंत्रियों (जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह) से मुलाकात हुई। लेकिन उनके जवाब से यह भी साफ है कि सरकार के साथ दो दिन तक उनकी मांगों पर चर्चा होती रही। पहले उन्होंने सरकार के सामने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत तीन मांगें रखी थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफे वाली मांग छोड़कर दो अन्य मांगों के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।