यह मत कहने लगना पैसे नहीं है; तमिलनाडु सीएम विजय थलापति पर स्टालिन का निशाना

अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति की राजनीति में फिल्मी एंट्री हो चुकी है। पहले चुनाव और फिर बहुमत को लेकर संघर्ष करने वाले विजय ने आज तमिलनाडु के नौवे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। इसके बाद पहले ही दिन विजय के धुर विरोधी पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने उन पर तंज कसना शुरू कर दिया है। शपथ के बाद विजय को लिखे बधाई संदेश में स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्हें हार्दिक बधाई, लेकिन तुरंत यह कहना शुरू मत कर दीजिएगा कि सरकार के पास पैसे नहीं है, क्योंकि सरकार के पर्याप्त मात्रा में पैसे हैं।

कांग्रेस समेत तमाम सहयोगियों के विजय के खेमे में जाकर बैठ जाने से नाराज चल रहे स्टालिन की कड़वाहट उनके बधाई संदेश में भी दिखी। सोशल मीडिया साइट एक्स पर उन्होंने लिखा,”मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए बधाई देता हूं। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ही उन्होंने जो आदेश दिए हैं उसका भी मैं स्वागत करता हूं। लेकिन तुरंत ही वह यह कहना शुरू न कर दें कि सरकार के पास पैसा नहीं है। क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त पैसा है। जरूरत है, तो उसे जनता के पास पहुंचाने की इच्छाशक्ति और शासन चलाने की क्षमता की।”

इसके बाद स्टालिन ने डीएमके सरकार द्वारा पिछले वर्षों में चलाई गई योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पांच वर्षों तक हमने कोविड और बाढ़ जैसी अनेक समस्याओं के साथ-साथ केंद्र की भाजपा सरकार की उपेक्षा का सामना करते हुए भी जनता के लिए अनगिनत कल्याणकारी योजनाएँ लागू कीं।

विजय द्वारा हाल ही में डीएमके सरकार के ऊपर खजाना खाली करने के आरोपों का भी पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “आपने (विजय ने) अपने पहले ही भाषण में हम पर यह आरोप लगाया है कि पिछली सरकार ने 10 लाख करोड़ का कर्ज छोड़ रखा है। वह खजाना खाली करके गई है। आपको बता दें कि तमिलनाडु का कर्ज अपने स्तर की कम से कम सीमा के भीतर ही है। हमारी सरकार ने फरवरी में अपने बजट के दौरान इसे स्पष्ट रूप से समझाया था। क्या आपको यह पता नहीं था? उसके बाद ही आपने जनता से कई वादे किए थे। जिन लोगों ने आपको वोट दिया है, उनको अब धोखा मत दीजिए और मुख्य मुद्दों से भटकाने की कोशिश मत कीजिए।”

स्टालिन यही नहीं रुके उन्होंने आने वाले समय के लिए भी विजय को चुनौतियों से अवगत करा दिया। उन्होंने कहा, “आप जनता से कहकर आए हैं कि ‘मैं वही वादे करूंगा, जो पूरा कर सकूं।’ अब आप सरकारी प्रशासन में कदम रख रहे हैं। मुझे विश्वास है कि जल्दी ही हमारी तरह आप भी जनता से किए वादों को पूरा करने की बारीकियां सीख जाएंगे। जिन लोगों ने आपको वोट दिया है, उनके साथ-साथ मैं भी यही अपेक्षा करता हूं।”

गौरतलब है कि स्टालिन और विजय के बीच की लड़ाई नई नहीं है। स्टालिन ने विजय के चुनावी अभियान के दौरान भी उन पर एक फिल्म स्टार होने और जमीन की जानकारी न होने का आरोप लगाया है। विजय ने भी खुले आम इसको स्वीकार करते हुए स्टालिन सरकार पर जमकर निशाना साधा। पहली बार चुनाव लड़ रहे विजय और उनकी पार्टी को शुरुआत में स्टालिन ने कोई बड़ी चुनौती नहीं माना था। लेकिन जैसे-जैसे समर्थन बढ़ता गया, डीएमके और एआईडीएमके के लिए परेशानी बढ़ती गई। चार मई को आए चुनावी नतीजों ने इन पार्टियों की हालत को खराब कर दिया।

डीएमके के सामने विजय की पार्टी केवल राज्य के स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। विजय पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि वह एनडीए के साथ नहीं जाएंगे। ऐसी स्थिति में उन्होंने चुनाव पूर्व ही कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की पेशकश की थी। लेकिन तब कांग्रेस ने अपने पुराने साथी डीएमके के साथ ही जाना बेहतर समझा। अब जब नतीजे आए तो कांग्रेस बिना डीएमके को बताए विजय के साथ चली गई। इस स्थिति में दशकों पुराना डीएमके और कांग्रेस का रिश्ता अधर में लटका हुआ है। कांग्रेस की मंशा है कि टीवीके और डीएमके दोनों ही उसके इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने। लेकिन विजय और स्टालिन एक-दूसरे के साथ आने को तैयार नहीं है।