भाजपा राम भरोसे, कांग्रेस अपने भरोसे, लक्की ड्रा से बनते रहे यहां विधायक
रणघोष अपडेट. रेवाड़ी
बावल आरक्षित सीट का इतिहास राजनीति के संघर्ष से नही असरदार नेताओं के रहमों करम से जाना जाता है। यहा चुनाव के समय मिलने वाली टिकट लक्की ड्रा की तरह होती है। इस बार भी यही तस्वीर बनती जा रही है। भाजपा से डॉ. कृष्ण कुमार यादव टिकट मिलने से दो दिन पहले तक स्वास्थ्य विभाग पंचकूला में निदेशक के पद पर कार्यरत थे। पहले उन्हें भाजपा सदस्य बनाया उसके बाद केंदीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की सिफारिश पर टिकट देकर मैदान में उतार दिया। सबकुछ इतनी जल्दी हुआ की समझ में नही आया की राजनीति उन्हें कितना जानती है ओर वे राजनीति को अभी तक कितना समझ पाए हैं। सबकुछ तीन घंटे फिल्म की तरह हो होता चला गया। यहा की जनता भी हैरान है की टिकट से पहले जो चेहरे कई महीनों से घर घर घूम रहे थे उनका बायाडोटा अचानक कैसे रिजेक्ट हो गया। जिसने बायाडोटा ही नही बनाया ओर वे बिना इंटरव्यू के सीधे सेलेक्ट हो गए। यह कमाल राजनीति में ही हो सकता है। इसलिए महज चार पांच दिनो में जन्मी डॉ. कृष्ण कुमार की यह राजनीति यात्रा अभी राम भरोसे चल रही है। उधर कांग्रेस से डॉ. एमएल रंगा इस मामले में भाजपा प्रत्याशी से काफी सीनियर्स है। उनके पास राजनीति में पास फेल होने की सभी डिग्रियां है। लेकिन वे भी मौका देखकर इधर उधर होते रहे हैं। इस बार किसी भी राजनीतिक दल की कोई लहर नही है जिस पर सवार होकर कोई आसानी से पार हो जाए। सबकुछ उम्मीदवार की अपनी जमीनी हैसियत पर टिका है। यहा भाजपा का मजबूत पक्ष यह है की उसके पास संगठन ओर आरएसएस की अच्छी खासी फौज है जबकि कांग्रेस में नेता का अपना रसूक और भाईचारा ही संगठन है। इसलिए इस सीट पर भाजपा राम भरोसे तो कांग्रेस अपने भरोसे आगे बढ़ रही है।