कोसली सीट पर जगदीश यादव की चर्चा बनती है..

विधायक नही बना पाए लेकिन जनता ने मजबूत नेता स्थापित कर दिया


रणघोष खास. कोसली से सुभाष चौधरी

हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम के दो दिन बाद भी हार जीत पर हो रहा मंथन अलग अलग कहानी को जन्म दे रहा है। कोसली सीट पर 74 हजार 673 वोट लेकर भाजपा उम्मीदवार अनिल यादव से 17 हजार 160 वोटों से हारे कांग्रेस उम्मीदवार जगदीश यादव पर चर्चा बनती है। चुनाव में किसी एक को जीतना है और किसी एक को हारना है। जाहिर है यह सामान्य बात है। चुनाव को किस तौर तरीकों से लड़ा गया ओर कैसे अपनी दमदार मौजूदगी दिखाई गईं। यहा पर जगदीश यादव की तारीफ बनती है। इस सीट पर बेशक वे कांग्रेस की टिकट पर लड़े लेकिन उनकी निजी हैसियत पार्टी के वोट बैंक से कई ज्यादा साबित हुईं। नाहड़ खंड और कोसली क्षेत्र से कांग्रेस और सांसद दीपेंद्र हुडडा के नाम पर उन्हें जो वोट मिलने चाहिए थे वे बिखरे हुए नजर आए जबकि लोकसभा चुनाव में यहां से दीपेंद्र हुडडा अच्छी खासी वोट लेने में सफल हुए थे। जगदीश यादव के लिए सबसे अच्छी बात यह है की उन्हें अपनी राजनीति जीवन में सबसे ज्यादा वोट इस बार मिले हैं। भाजपा से अनिल यादव शुरूआत से ही चारों तरफ से संगठन, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद और भाजपा कैडर के साइलेंट वोट बैंक की वजह से मजबूत नजर आ रहे थे। जबकि जगदीश यादव अपने नाम से कोसली के हर गांव में जीत का रास्ता तलाश रहे थे। यहा सबसे गौर करने वाली बात यह रही की जगदीश यादव के ईर्द गिर्द हमेशा पार्टी के नाम पर ऐसे मठाधीशों का जमावड़ा बना रहा जिसके चेहरे को देखकर जनता दूरिया बनाना शुरू कर देती थी। ये वो चेहरे थे जिनकी अपने गांवों में भी हैसियत नही थी। इनका मकसद चुनाव प्रचार में हर समय कांग्रेस प्रत्याशी के आस पास चिपके रहना, मीडिया में फोटो खिंचवाना और आराम से गाड़ी में बैठकर अपना समय गुजारना था। इसका खामियाजा भी इस नेता को भुगतना पड़ा। जबकि अनिल यादव हर गांव में खुद अकेले  लोगों के बीच में पहुंच रहे थे। उसके आस पास आयोजन कराने वाले ही नजर आते थे। जगदीश यादव का प्रबंधन काफी बेहतर रहा लेकिन वह भाजपा के कोर वोट बैंक को तोड़ने में नाकाम रहा। उसकी नजरें केवल केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह समर्थकों पर रही। कुल मिलाकर कोसली में जगदीश यादव ने जो शानदार वोट हासिल किए हैं यह उनकी लंबे संघर्ष से चलती आ रही राजनीति की असल पूंजी है जिसे संभाले रखना इस नेता के लिए बेहद जरूरी हो जाएगा। वजह इस पूंजी में कांग्रेस का हिस्सा महज नाम का है। इसलिए जगदीश यादव चुनाव में विधायक बेशक नही बन पाए लेकिन एक मजबूत नेता के तोर पर एक बार फिर स्थापित हो गए।