रेवाड़ी सीट पर ये सवाल बैचेन कर रहे हैं

आज भी रेवाड़ी के हालात शर्मसार है, कांग्रेस- भाजपा  किस हैसियत से वोट मांग रहे है


रणघोष खास. रेवाड़ी की कलम से

 रेवाड़ी विधानसभा सीट कांग्रेस और भाजपा की प्रतिष्ठा से इसलिए जुड़ी हुई है की दक्षिण हरियाणा राजनीति की स्क्रिप्ट इसी जमीन से लिखी जाती है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय है। जिसमें आम आदमी पार्टी से सतीश यादव मैदान में है। इनेलो बसपा गठबंधन से विजय सोमाणी व निर्दलीय उम्मीदवार प्रशांत सैनी इस राजनीति समोसे में किसी के लिए मीठी तो किसी के लिए हरी चटनी का काम कर रहे है।

यहा चर्चा भाजपा और कांग्रेस की होगी। जिन्होंने लंबे समय से सत्ता में रहकर रेवाड़ी को अपने नजरिए से आगे पीछे किया है। तीसरे की चर्चा इसलिए नही होगी उसे यहा से जीत नही मिली है। इसलिए जवाबदेही में नही आता।  कांग्रेस से कप्तान अजय सिंह यादव 6 बार और उनके बेटे चिरंजीव राव एक बार विधायक बनकर इस सीट की जड़ों में बैठे हुए हैं। यह परिवार इस चुनाव में भाजपा पर 10 सालों में विकास नही कराने के नाम पर वोट मांग रहा है। इस परिवार का दावा है की जब जब कांग्रेस की सरकार में वे ताकतवर रहे। उन्होंने रेवाड़ी की तस्वीर बदलने का काम किया है। उधर भाजपा की तरफ से पहली बार लक्ष्मण यादव मैदान में हैं। इससे पहले 2014 में रणधीर सिंह कापड़ीस विधायक रह चुके हैं। भाजपा अभी तक इस सीट पर एक बार ही जीत पाई है। जबकि रेवाड़ी जिला बनने के बाद से कप्तान परिवार ही राज करता आ रहा है। भाजपा रेवाड़ी की बदहाली के लिए कप्तान परिवार को पूरी तरह से जिम्मेदार मान रही है। उसका आरोप है कांग्रेस सरकार में विकास के नाम पर लगी एक एक ईंट के नीचे भी भ्रष्टाचार मिलेगा। इस परिवार ने रेवाड़ी को जमकर लूटा है। इसलिए गुरुग्राम में राजाओं की तरह रहता है और यह शहर विकास तो दूर आज मुलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। जगह जगह कचरों का ढेर, गंदे पानी की निकासी नही होना, जर्जर सड़कें, नगर परिषद समेत अनेक कार्यालयों में भ्रष्टाचार का चरम पर पहुंचना विशेष तौर से शामिल है। कमाल की बात देखिए दस साल से भाजपा सरकार में है। अगर कप्तान परिवार ने जमकर लूटा है तो इसकी जांच क्यों नही कराईं। उधर कप्तान परिवार वास्तव में पूरी तरह से ईमानदार रहा है तो उसे एक एक वोट के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है। गौर करिए दोनो ही पार्टियों के नेता सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार करते आ रहे हैं की रेवाड़ी की तस्वीर विकास के नाम पर शर्मसार है। अब सवाल उठता है की यह हालात भाजपा सरकार के समय में हुए हैं या कांग्रेस राज से ही चलते आ रहे हैं। जाहिर है 2014 से पहले लंबे समय तक रही कांग्रेस सरकार में भी  रेवाड़ी गर्व करने वाली नही थी। इस सीट पर 2014 से 2019 तक भाजपा विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास रहे। उसके बाद 2019 में कांग्रेस से चिरंजीव राव विधायक बने और इससे पहले छह बार उनके पिता विधायक के साथ साथ सरकार में बड़े मंत्री रहे। ऐसे में पिता पुत्र का रेवाड़ी की  बदहाली के लिए भाजपा को पूरी तरह से  जिम्मेदार मानना किसी भी सूरत में तर्क संगत नही है। बहुत सी परियोजना ओर योजनाए सालो साल पहले बनकर आज भी  किसी भी क्षेत्र में मिशाल के तोर पर याद की जाती है। यहा तो दोनों दलों के नेताओं के पास यह बताने को कुछ नही है बस हवा में तीर चला रहे हैं। जाति धर्म के नाम पर वोटरों को जरूर बांटने में कामयाब रहे हैं।  बस राष्ट्रीय पार्टी का चेहरा होने की वजह से अपने अपने हिसाब से दावेदारी पेश कर रहे हैं।  देखा जाए तो दोनों ही दल इस क्षेत्र के बुरे हालातों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। अब देखना यह है की जनता दोनों में किसी एक में फिर भरोसा जताती है या तीसरे विकल्प का प्रयोग करती है। यह नतीजों के बाद पता चलेगा।