कोसली सीट का मिजाज बदल रहा यह चेहरा

कोसली रवि यादव को ओर रवि यादव कोसली को बखूबी जानते- समझते हैं, बात खत्म 


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

दक्षिण हरियाणा की दो लोकसभा गुरुग्राम व रोहतक सीट पर सीधा असर डालती आ रही कोसली विधानसभा में इस बार चुनाव समय से पहले पूरी तरह से उफान पर आ चुका है। मुकाबला सीधे तोर पर भाजपा ओर कांग्रेस के बीच में है। यहां से लक्ष्मण यादव मौजूदा विधायक है। इससे पहले भी यह सीट भाजपा के खाते में पूर्व मंत्री विक्रम यादव के तौर पर रही थी। इस बार दावेदारी में मजबूत चेहरों की संख्या ज्यादा है। जिसमें एक अहम नाम रवि यादव का है जिन्होंने 45 साल से अधिक समय तक यहां के धाकड़ नेता केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की राजनीति को निजी सचिव के तौर पर ना केवल पूरी तरह से संभाले रखा साथ ही चटटान की तरह हर चुनौतिया का अपने कुशल प्रबंधन से सामना भी किया। राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से वे छह माह से  कोसली की जमीन पर बिखरी राजनीति को इधर उधर से संभालते हुए राव के दिशा निर्देश पर अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। रवि यादव के लिए कोसली समझ  राव इंद्रजीत सिंह की राजनीति नर्सरी से शुरू हो गई थी। जब राव ने 45 साल पहले अपनी राजनीति पारी की शुरूआत इसी जमीन से की थी। उस समय यह सीट जाटूसाना के नाम से जानी जाती थी। उसी दौर में गांव कंवाली के रहने वाले युवा रवि यादव ने राव इंद्रजीत सिंह के कामकाज को संभालना शुरू कर दिया था जो आज तक बिना रूके बिना थके जारी है।  यह राजनीति  के क्षेत्र में चुनिंदा उदाहरण है जब एक युवक अपना पूरा जीवन एक राजनीति नेता को निजी सचिव के तोर पर समर्पित कर देता है। राव इंद्रजीत का आमतौर पर दिल्ली रहना होता है। उनके पीछे रवि यादव ने ही इतने लंबे समय तक अपने कुशल प्रबंधन से क्षेत्र की राजनीति को ना केवल संभाले रखा साथ की विरोधियों की तरफ से होते रहे हमलों का भी सीधा सामना किया।  रवि यादव शुरूआत से ही मीडिया की सुर्खियों से दूर रहे हैं। उनके काम करने का तौर तरीका केवल राव इंद्रजीत सिंह जानते है। यही वजह है की आस पास जिलों में रवि यादव राव इंद्रजीत सिंह की एक पहचान के तोर पर परिचित हैं। रवि यादव की कोसली से चुनाव लड़ने की चर्चा 2019 में भी पूरी तरह से चली थी। यहा तक की उनकी टिकट को राव इंद्रजीत सिंह के कोटे में सुरक्षित मान लिया गया था लेकिन अंतिम समय में समीकरण बदल गए। इस बार रवि यादव पूरी तैयारी के साथ छह माह पहले ही राव के मार्गदर्शन में कोसली के एक एक घर में जाकर चाय पर चर्चा कर रहे हैं। उनका मजबूत पक्ष यह है की कोसली उन्हें बखूबी जानती है ओर वे कोसली को। इसलिए रवि यादव अच्छी तरह से जानते हैं की इतनी लंबी राजनीति यात्रा के बीच कौन रूठा हुआ है जिसे मनाना है ओर कौन खास है जिसे जिम्मेदारी देनी है। राव की राजनीति विरासत आज भी कोसली में मजबूत है जो टिकट मिलने पर रवि यादव के लिए रामबाण का काम करेगी। देखना यह है की भाजपा हाईकमान राव की सबसे दिल के करीब इस सीट को उनके मुताबिक किस खाते में रखती है। राव की बेटी आरती राव भी इस बार चुनाव लड़ने जा रही है। वे कहां से लड़ेगी यह देखने वाली बात होगी। ऐसे में कोसली सीट पर भाजपा का निर्णय बेहद ही निर्णायक साबित होने जा रहा है।