प्रकृति के साथ संस्कारों की सुगंध फैलाती यह सोसायटी

अमनगनी दादा दादी- पोते पोतियों की जुगलबंदी देख खिलखिलाती रही  


रणघोष अपडेट. रेवाड़ी

कभी कभी आपकी ख़ुशी आपकी मुस्कान का स्त्रोत होती है, लेकिन कभी कभी आपकी मुस्कान आपकी ख़ुशी का स्त्रोत हो सकती है। परिवार के इन पूजनीय, हमारे दादा,दादी,नाना,नानी का हमारे जीवन में महत्ता दर्शाने हेतु और उनको उनके नन्हे नाती, नातिन, पोते, पोती की ख़ुशी में शामिल करने के लिए गढ़ी बोलनी रोड स्थित अमनगनी सोसायटी के प्रांगण में संस्कारों की सुगंध से सराबोर मुस्कराते रहिए कार्यक्रम का  आयोजन किया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही इसमें बच्चो के माता पिता को आने की अनुमति नही थी। अमनगनी सोसायटी के एमडी त्रिलोक शर्मा ने कहा की दादा दादी, नाना नानी बच्चों के चरित्र का निर्माण करने में तथा उनकी बुनियाद मज़बूत करने में एक अहम् भूमिका निभाते हैं ।दादादादी का नाम आते ही उनसे मिला लाड़प्यार याद जाता है, कैसे माता पिता की डांट से बचाना, सारी फरमाइशयें पूरी करना, ये सब उन्ही के बस की बात है जैसे एक पतंग को ऊँची उड़ान भरने के लिए डोर में ढील देने की जरुरत पड़ती है, वही काम दादादादी या नानानानी करते है; क्यूंकि डोर ज्यादा खींचने से टूट जाती है ।इस प्यार और अनुशासन के बीच का तालमेल बनाते है हमारे दादा दादी, नाना  नानी। यह बहुत ख़ास दिन है और सभी के दिल के बहुत करीब है सभी ने अपने बचपन को अपने पोते पोतियों के साथ भरपूर जिया। चारों ओर खुशनुमा माहौल देखते ही बनता था।