नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे छात्र प्रोटेस्ट और संसद में विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा के प्रावधान वाले कानून के मसौदे पर चर्चा की जाएगी। सोशल मीडिया पर लगभग तीन मिनट का वीडियो संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई मामूली मुद्दा नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को बहुत दुख हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि कथित नीट पेपर लीक के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना थी कि छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह पक्का करना था कि स्टूडेंट्स का एकेडमिक साल बर्बाद न हो। जल्द से जल्द परीक्षा कराना जरूरी था। सरकार ने करीब 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने के लिए अपनी पूरी प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी थी। परिणाम 19 जुलाई को घोषित किए गए।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने कम से कम समय में लगभग 22 लाख छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया। सिर्फ चार-पांच दिन पहले, 19 तारीख को रिजल्ट घोषित हुए और देशभर से सफल अभ्यर्थियों के अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं।
आरोपियों के खिलाफ जारी है कार्रवाई
उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ऐसे लोग नहीं हैं जो सिर्फ इतने से संतुष्ट हो जाएं। इसलिए आज मैंने विभागों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स के लिए प्रावधान तैयार करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों ने दिन भर काम करके कानून का मसौदा तैयार किया, जो गुरुवार देर रात सौंपा गया। पीएम मोदी ने कहा कि ड्राफ्ट कानून में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा के प्रावधान शामिल हैं। इस पर कल कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट के साथियों के सुझावों को शामिल करने के बाद बिल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जारी है विरोध-प्रदर्शन
बता दें कि नीट पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर के साथ देश भर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियां भी सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि जब तक धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा, सदन में कोई चर्चा नहीं होगी।