गुरू आशीर्वाद से मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा बदल जाती है। शिष्यों पर गुरू का साया आशीर्वाद सदैव रहता है। वे अपने शिष्यों के दुख, परेशानी बिना बताए ही समझ जाते हैं मगर शिष्यों में गुरू के प्रति समपर्ण, श्रद्धा भाव का होना जरूरी है। यह बात स्थानीय गामडी क्षेत्र स्थित जैन समाधी स्थल, गुरू मंदिर में उपस्थित जैन श्रद्धालुओं को आचार्य श्री ज्ञानचंद महाराज की दीक्षा जयंती उपलक्ष्य में आयेाजित भजन व कीर्तन कार्यक्रम के दौरान उपप्रवर्तक महाश्रमण पंडित रतन आनंद मुनि जी तथा प्रवचन दिवाकर दीपेश मुनि ने कही। उन्होने कहा कि आचार्य श्री ज्ञानचंद महाराज संसार का कल्याण करने के लिए अवतरित हुए थे, उनके चरित्र को अपनाकर मनुष्य अपना जीवन सुधार सकता है। अच्छा गुरू शिष्य मिलकर सुंदर संसार की संरचना करते है। इसलिए गुरूओं के प्रति सदैव श्रद्धाभाव का होना चाहिए। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं हो सकता। खुद को कमजोर समझना सबसे बडा पाप है। गुरू के प्रति सच्ची श्रद्धा, तप, संयम से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। तप व संयम का गुरू सम्मान में बहुत महत्व है। संसार में तीर्थंकरों का अस्तित्व मर्यादित समय के लिए ही होता है। उनके अभाव में धर्म गुरू ही धर्म का बोध देते हैं। गुरू के उपदेश से शिष्य के हृदय में वैराग्य भाव का बीजोरोपण होता है। आज की प्रभावना का वितरण विजय सैनी ने सहपरिवार किया। प्रवचन दिवाकर दीपेश मुनि ने बताया कि आगामी 21 से 28 फरवरी तक आनंद मुनि की 56वां दीक्षा दिवस अवसर पर साप्ताहिक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत 25 फरवरी को रक्तदान शिविर जैन स्थानक छोटी बजारी में आयोजित होगा। 28 फरवरी को गामडी क्षेत्र स्थित जैन समाधी स्थल परिसर में संयम गुरू गुणगान महोत्सव आयोजित होगा। इस अवसर पर जैन समाज के महिला, पुरूष, बच्चे, मौजिज नागरिक उपस्थित थे।