रणघोष की सीधी सपाट बात

तहसील में सौदागर बने अधिकारियों ने 2017 में शिशुशाला स्कूल की भी कर दी थी रजिस्ट्री, अब हो रहा खुलासा


रणघोष खास. रेवाड़ी


तहसील में जमीन से जुड़े काम ईमानदारी से होते हैं। यह कहना- सोचना ओर भरोसा करना ठीक उसी तरह है जिस तरह भूखे शेर से यह उम्मीद की जाए कि वह गिड़गिड़ाने पर रहम कर शिकार को छोड़ देगा। शहर में एक समय की सबसे नामी शिक्षण संस्था शिशुशाला स्कूल को 2017 में कुछ प्रोपर्टी डीलरों ने उस समय की प्राचार्य से मिलकर बेचने के इरादे से उसकी रजिस्ट्री तक करा दी थी। जिस तहसीलदार ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया वह अब सरकार की तरफ से कराई जा रही जांच में फंसते जा रहे है। इस रजिस्ट्री में तत्कालीन नगर पार्षद सुचित्रा चांदना, दीपक सतीजा बतौर गवाह बने हुए थे । इस पूरे खेल में  जिला फर्म एवं रजिस्ट्रार का एक कर्मचारी समेत इस स्कूल  की प्रबंधक समिति के कुछ सदस्य भी बहती गंगा में अपना हाथ धो चुके है। जिनका खुलासा होना अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि इस जमीन की खरीद फरोख्त करते समय इकारनामा के नाम पर 3 करोड़ की राशि को काम के अंजाम तक पहुंचाने के इरादे से बांटा गया था लेकिन कुछ लोगों की ईमानदार सोच के चलते यह शिक्षण संस्था डीलरों का शिकार होने से बच गईं। अभी इसका मामला कोर्ट में चल रहा है और संस्थान को चलाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रशासक नियुक्त किया हुआ है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में नियमों को ताक पर रख की गई रजिस्ट्रियों का खुलासा होने के बाद इस तरह के मामले अब सामने आ रहे हैं। 14 मार्च 2017 सुनंदा दत्ता एवं अन्य  ने स्कूल की रजिस्ट्री की हुई है। यहां बता दें कि यह स्कूल मॉडल टाउन में सबसे महंगी जमीन वाला जमीन पर बना हुआ है जिस पर कई भूमाफियों की नजर थी। इस स्कूल को दत्ता बहनें चलाती आ रही थी जिसमें शहर की नामी हस्ती कहलाए जाने वाले 32 से ज्यादा लोग सदस्य के तौर पर सहयोग करते आ रहे थे। इन बहनों की मौत के बाद दूर की रिश्तेदार ने स्कूल प्रबंधन को अपने कब्जे में ले लिया। उसके बाद से ही स्कूल को बेचने की योजनाएं बनती चली गईं। समिति सदस्यों में कुछ का ईमान भी बिक गया। जिसके चलते इस स्कूल को बेचने के मकसद से इसकी रजिस्ट्री करा दी गईं। उस समय तहसील विभाग के तत्कालीन तहसीलदार भी शिक्षा के इस मंदिर को बेचने में शर्मसार नहीं हुए।  वर्तमान में स्कूल पर प्रशासक नियुक्त हो चुका है। इस पूरे मामले में जिला फर्म एवं रजिस्ट्रार सोसायटी के एक कर्मचारी की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध रही। इस स्कूल को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे सदस्यों का कहना है कि यह बहुत बड़ा जमीन का स्कैंडल है। किसी बड़ी जांच एजेंसी से जांच कराई जाए तो बड़े असरदार लोग भी बेनकाब हो जाएंगे।

 शिशुशाला स्कूल बचाने में इन अधिकारियों की रही विशेष भूमिका

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जमीनी वैल्यू के आधार पर करीब 60 करोड़ रुपए की इस प्रोपर्टी को बचाने में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भी विशेष भूमिका रही। इसमें विशेषतौर से मौजूदा डीसी यशवेंद्र सिंह, तत्कालीन एसडीएम कुशल कटारिया एवं एसडीएम रविंद्र यादव विशेष तौर से शामिल है। एक समय ऐसा भी आ चुका था जब शिशुशाला को संचालित करने वाली समिति के आधे से ज्यादा सदस्य चालाकी से बड़ा खेल करने की फिराक में प्रस्ताव पारित कर स्कूल बेचने के मंसूबों को पूरा करने में कामयाब नजर आ रहे थे।

इन समिति सदस्यों ने भी नहीं बेचा अपना ईमान

स्कूल की समिति में कुछ सदस्यों ने स्कूल बेचने के इरादों की खुलकर खिलाफत की। इन सदस्यों को तरह तरह का प्रलोभन भी दिया गया। कुछ सदस्य सामने आने की बजाय मौन रहकर अपना सहयोग कर रहे थे। स्कूल बचाने के लिए खुलकर सामने आने वाले सदस्यों में पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव, विजय सोमाणी, सूर्यकांत सैनी, अशोक सोमाणी,वर्धमान ज्वैलर्स के संचालक डीके जैन का विशेष योगदान रहा। 

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