रणघोष की सीधी सपाट बात

लाखों रुपए विज्ञापन पर खर्च कर फ्री इलाज का दावा करें, सावधान रहे ये डॉक्टर्स नहीं कसाई है


 रेवाड़ी शहर में फल-  सब्जी, पुस्तकें, जिम, मोबाइल, कंप्यूटर की दुकानें नहीं मिलेगी उससे ज्यादा अस्पताल खुल चुके हैं।


रणघोष खास. सुभाष चौधरी


अलग अलग बीमारियों से पीड़ित लोग इलाज के नाम पर अलर्ट हो जाए। जो डॉक्टर्स लाखों रुपए विज्ञापन के नाम पर खर्च कर यह दावा करें कि उनके यहां फ्री इलाज, चैकअप होता है, भारी छूट के साथ जांच की जाती है, फ्री एंबुलेंस की सुविधा, शरीर में आक्सीजन, बीपी, शूगर समेत लगभग सभी बीमारियों की जांच फ्री। फौजी भाईयों के लिए अलग से छूट। दिल्ली- गुरुग्राम से सस्ता इलाज। एक अस्पताल हरियाणा सरकार का लंबा चौड़ा लोगो लगाकर यह दावा कर रहा है कि वह सरकारी पैनल में हैं यानि वह सरकारी प्रोफाइल का तड़का लगाकर मरीजों को वशीभूत कर अपने यहां आने का निमंत्रण दे रहा है। सबकुछ खुलेआम हो रहा है।  हद तो उस समय हो गई थी जब करीब एक साल पहले शहर के दो-तीन बड़े नामी ह्रदय रोग डॉक्टरों में इलाज के नाम पर मरीजों को तरह तरह का लालच देकर अपने यहां भर्ती करने की होड़ मच गई थी।  खुलेआम अखबारों के विज्ञापनों में प्रचारित कराया गया कि हमारे यहां इलाज कराएंगे तो बेहद सस्ती दर का पैकेज खर्च होगा। दूसरे वाले लूटते हैं। विज्ञापनो में बकायदा अलग अलग इलाज- चैकअप के नाम पर रेटों की सूची तक प्रकाशित की गई थी। ऐसा लग रहा था कि डॉक्टरों के लिए मरीज मुर्गा या बकरा है जिसे हलाल करने के लिए डॉक्टर्स कसाई बनने के लिए तैयार बैठे हैं। इस पर काफी विवाद हुआ तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दो डॉक्टरों के लाइसेंस को एक सप्ताह के लिए सस्पेंड कर दिया था । यानि सजा भी ऐसी थी जैसे स्कूल में होमवर्क नहीं करने पर छात्र को बैंच पर खड़ा कर दिया जाता है। इस सजा में नैतिकता थी दर्द नहीं। इसलिए  कभी नहीं सुधरने वाले वाले ये छात्र इस सजा के साथ इंजवाय करते हुए अपने अंदर के उस डर को भी खत्म कर डालते है जो उसे शिक्षक ने दिया था। यही स्थित डर के नाम पर  की जाने वाली कार्रवाई के खोखलेपन से उत्साहित डॉक्टरों में देखी जा सकती है।

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 रेवाड़ी के 6 किमी दायरे में 150 अस्पताल

बेहतर स्वास्थ्य-  शिक्षा का सरकार का दावा कोमा में अंतिम सांसें ले रहा है। रेवाड़ी शहर के 6-8 किमी दायरे में छोटे- बड़े प्राइवेट अस्पतालों की संख्या 150 के आस पास पहुंच चुकी है। यानि शहर में इतनी फल-  सब्जी, पुस्तकें, जिम, मोबाइल, कंप्यूटर की दुकानें नहीं मिलेगी उससे ज्यादा अस्पताल खुल चुके हैं। अस्पतालों की बनावट, सुसज्जा एवं सुविधाएं इतनी शानदार ढंग से हैं मानो मरीज किसी शानदार होटल में एंट्री कर रहा है। यहीं से मरीज के परिजनों का इलाज के नाम पर लूटने का खेल शुरू हो जाता है। अधिकांश इलाज के नाम पर लूटकर आ जाते हैं जिसका धैर्य जवाब दे जाता है वे झगड़ों की वजह बन जाते हैं।

 एक अच्छे डॉक्टर की पहचान इलाज के समय स्वत: हो जाती है

एक अच्छे डॉक्टर्स की पहचान इलाज के समय स्वत: ही हो जाती है जब डॉक्टर्स बिना किसी लालच के मरीज के साथ ईमानदारी से पेश आता है। उसकी लिखी दवाइयों से साफ जाहिर हो जाता है कि उसे मरीज की चिंता है या अपने इलाज के नाम पर ज्यादा से ज्यादा वसूल  किए जाने वाले बिलों की। अगर किसी डॉक्टर्स की तरफ से लिखी गई दवाईं मरीज के परिजन किसी भी मेडिकल स्टोर से खरीद सकते हैं तो समझ जाइए डॉक्टर्स काफी हद तक अपने पेशे के प्रति ईमानदार है। अगर उसकी दवाईयां केवल उसके द्वारा संचालित मेडिकल स्टोर पर ही मिलेगी तो यह तय है कि यह डॉक्टर्स इलाज से ज्यादा कमीशनखोरी में ज्यादा एक्सपर्ट है। एक अच्छा डॉक्टर हमेशा मरीज की भलाई के लिए उसी हद तक आशावादी होता है जितना कि स्वयं।  वह मरीज. मरीज से बीमारी की गंभीरता को छुपाये बिना भी वह आशा का संदेश देता है। कैसी भी बीमारी हो, वह मरीज में भरोसा और आशा जगाए रखता है. वह कभी भी निराश होकर अपने हाथ खड़े नहीं करता।

 इलाज से पहले परिजन पूछते हैं काटेगा तो नहीं..

जब इलाज कराने के नाम पर परिजन अस्पताल में भर्ती कराने के लिए घर से रवाना होते   हैं तो वे अपने मिलने वालों से तसल्ली करते हैं कि ये डॉक्टर्स इलाज के नाम पर काटेगा तो नहीं..। उनकी पीड़ा मरीज के दर्द से ज्यादा डॉक्टरों की लालची नजरों को देखकर ज्यादा रहती है। इसलिए ऐसे डॉक्टरों की तलाश ज्यादा रहती हैं जिसमें मानवता- इंसानियत हिलोरे मारती नजर  आती हो।

 प्रोपर्टी डीलरों के पास डॉक्टर्स- शिक्षक बड़े क्लाइंटस

शहर में जितने भी प्रोपर्टी डीलर्स अपना कार्यालय खोलकर बैठे हैं उनके पास ज्यादा खरीदने- बेचने वालों की सूची में डॉक्टर्स एवं उसके बाद सरकारी शिक्षक प्राइवेट स्कूल के मालिक आते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य के नाम पर बह रही राशि किस किस रास्तों से होकर गुजर रही है। यह याद रखना चाहिए कि इन दोनों पेशो को मर्यादा- आदर्श में सबसे सर्वोच्च स्थान मिला हुआ है।

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