Adani Summons Row: US SEC का समन भारत ने क्यों लौटाया? 2 बार इनकार की असली वजह
अमेरिका के शेयर बाजार नियामक SEC (Securities and Exchange Commission) और भारत सरकार के बीच उद्योगपति गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को भेजे गए समन को लेकर बड़ा कानूनी और कूटनीतिक गतिरोध सामने आया है। अमेरिकी SEC ने दो बार भारत के विधि मंत्रालय के माध्यम से समन तामील कराने की कोशिश की, लेकिन भारत सरकार ने दोनों बार तकनीकी आपत्तियों का हवाला देते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
यह मामला सामने आते ही शुक्रवार को शेयर बाजार में अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे ग्रुप की कुल मार्केट कैप में लगभग एक लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।
दो बार क्यों लौटाया गया SEC का समन
दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार ने मई 2025 और दिसंबर 2025 में दो अलग-अलग मौकों पर SEC द्वारा भेजे गए समन वापस लौटा दिए।
मई 2025 में जब पहली बार समन भेजा गया, तब विधि मंत्रालय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि SEC के कवर लेटर पर ‘इंक सिग्नेचर’ यानी वास्तविक हस्ताक्षर नहीं थे और आवश्यक दस्तावेजों पर आधिकारिक मुहर भी नहीं लगी हुई थी। मंत्रालय का तर्क था कि बिना विधिवत हस्ताक्षर और मुहर के समन को वैध नहीं माना जा सकता।
इसके बाद दिसंबर 2025 में जब दूसरी बार समन भेजा गया, तब भारत सरकार ने एक और तकनीकी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई। मंत्रालय ने SEC के ही एक आंतरिक नियम Rule 5-b का हवाला देते हुए कहा कि समन जारी करना उन प्रवर्तन टूल्स की श्रेणी में नहीं आता, जिन्हें इस नियम के तहत कवर किया गया है। सरल शब्दों में, भारत सरकार ने SEC के समन जारी करने के अधिकार पर ही सवाल खड़े कर दिए।
SEC ने भारत के तर्कों को बताया निराधार
SEC ने इस पूरे मामले में न्यूयॉर्क की एक अदालत में याचिका दायर की है। अपनी अर्जी में SEC ने भारत सरकार द्वारा उठाई गई तकनीकी आपत्तियों को निराधार बताया है।
SEC का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समन भेजने के लिए किसी विशेष मुहर या इंक सिग्नेचर की अनिवार्यता नहीं होती। इसके साथ ही SEC ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस Rule 5-b का हवाला भारत सरकार दे रही है, वह SEC की आंतरिक जांच प्रक्रिया से संबंधित है, न कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन भेजने की उसकी कानूनी शक्ति से।
अब SEC ने अमेरिकी अदालत से यह अनुमति मांगी है कि वह ईमेल के जरिए गौतम अडाणी और सागर अडाणी को नोटिस भेज सके।
अडाणी ग्रुप का पक्ष
अडाणी ग्रुप ने इस पूरे मामले में सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ग्रुप की ओर से कहा गया है कि यह कार्यवाही पूरी तरह सिविल प्रकृति की है और इसमें किसी तरह के आपराधिक आरोप शामिल नहीं हैं।
अडाणी ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया कि कंपनी इस कानूनी कार्यवाही में किसी भी तरह से पक्षकार नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ न तो रिश्वतखोरी और न ही भ्रष्टाचार से जुड़े कोई आरोप लगाए गए हैं।
शेयर बाजार पर बड़ा असर
इस खबर के सार्वजनिक होते ही शुक्रवार को शेयर बाजार में अडाणी ग्रुप की कंपनियों में भारी बिकवाली देखने को मिली। अडाणी ग्रुप की कुल मार्केट कैप में करीब एक लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर अडाणी ग्रीन एनर्जी के शेयरों पर पड़ा, जिनमें करीब 14.6 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
निवेशकों में अनिश्चितता और कानूनी विवाद को लेकर चिंता के चलते ग्रुप के अन्य शेयरों पर भी दबाव बना रहा।
आगे क्या?
अब सबकी नजर अमेरिकी अदालत के फैसले पर टिकी है कि SEC को ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मिलती है या नहीं। साथ ही यह मामला आने वाले समय में भारत-अमेरिका के बीच कानूनी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय नियामकीय प्रक्रियाओं को लेकर भी अहम मिसाल बन सकता है।