Saudi Aramco पर ईरानी ड्रोन हमला? रास तनूरा रिफाइनरी एहतियातन बंद
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको पर कथित ईरानी ड्रोन हमले की खबर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, ईरानी ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित रास तनूरा रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य अभियानों के जवाब में तेहरान क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय प्रतिक्रिया दे रहा है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय का बयान: दो ड्रोन इंटरसेप्ट
सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने अल-अरबिया टीवी को बताया कि इस क्षेत्र में दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया। ड्रोन के मलबे से सीमित स्तर पर आग लगी थी, जिसे तुरंत काबू कर लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार:
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किसी के घायल होने की सूचना नहीं है
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आग पर तुरंत नियंत्रण पा लिया गया
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हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं
हालांकि अरामको की ओर से इस घटना पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाला अहम टर्मिनल
रास तनूरा कॉम्प्लेक्स मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है। इसकी क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है।
यह केवल एक रिफाइनरी नहीं, बल्कि सऊदी कच्चे तेल के निर्यात का प्रमुख टर्मिनल भी है। ऐसे में इसका बंद होना वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।
वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप
रिफाइनरी बंद होने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखी गई।
पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री व्यापार बाधित है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत इसी मार्ग से होकर गुजरती है। हालिया हमलों के कारण इस समुद्री रूट पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
क्या हो सकता है आगे?
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा संरचना लगातार निशाने पर आती रही, तो:
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तेल आपूर्ति श्रृंखला गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है
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वैश्विक बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है
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एशिया और यूरोप के आयातक देशों पर सीधा असर पड़ सकता है
रिस्क इंटेलिजेंस फर्म वेरिस्क मेपलक्रॉफ्ट के मिडिल ईस्ट विश्लेषक टॉरब्योर्न सोल्टवेड्ट ने कहा कि रास तनूरा पर हमला क्षेत्रीय तनाव में बड़ी वृद्धि का संकेत है और अब खाड़ी देशों की ऊर्जा अवसंरचना सीधे निशाने पर है।
उनके अनुसार, इस घटना के बाद सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों के और करीब आ सकते हैं।
कई खाड़ी देशों में हमलों की श्रृंखला
रास तनूरा पर ड्रोन हमला क्षेत्र में हालिया हमलों की कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार:
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अबू धाबी
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दुबई
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दोहा
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मनामा
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ओमान का दुक्म वाणिज्यिक बंदरगाह
को भी निशाना बनाया गया है।
इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी एहतियातन तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया गया है। फरवरी में यहां से लगभग 2 लाख बैरल प्रतिदिन तेल तुर्की को निर्यात किया गया था।
क्या यह वैश्विक ऊर्जा संकट की शुरुआत है?
यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप ले सकता है।
भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देश खाड़ी तेल पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल संभव है।
फिलहाल दुनिया की नजर सऊदी अरब और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। क्या यह सीमित जवाबी कार्रवाई तक सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेगा—आने वाले दिन तय करेंगे।