रेवाड़ी सीट पर कापड़ीवास नाम असरदार है

ताऊ के संघर्ष से राजनीति को मजबूत कर रहे मुकेश कापड़ीवास


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

दक्षिण हरियाणा की राजनीति का मुख्यालय कहलाए जाने वाली रेवाड़ी विधानसभा सीट पर कापड़ीवास नाम बेहद असरदार है जिसकी वजह से हार जीत का चेहरा बदल जाता है। इस सीट को 2000 से आज तक सुबह शाम जीते आ रहे पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास को कागज में दर्ज उम्र बेशक आराम करने की सलाह दे रही हो लेकिन उनका शरीर आज भी हर लिहाज से राजनीति ऊर्जा से लबालब है। भाजपा हाईकमान ने अगर  कागज पर लिखी उम्र पर टिकट का फैसला सुनाया तो भी कापड़ीवास नाम असरदार रहेगा। रणधीर सिंह कापड़ीवास के भतीजे मुकेश कापड़ीवास ने उनके साथ कदमताल करते हुए उनकी राजनीति यात्रा में अपनी उम्र को शामिल कर लिया है। लिहाजा जमीन पर राजनीति हैसियत देखकर फैसला सुनाया गया तो वह कापड़ीवास परिवार के पक्ष में जा सकता है।

इसमें कोई दो राय नही मुकेश कापड़ीवास को अपने ताऊ की राजनीति पहचान तक पहुंचने के लिए अभी अनेक चुनौतियों से गुजरना होगा। जब वे राजनीति में सक्रिय हुए उस समय उनके ताऊजी 2014 में रेवाड़ी से विधायक थे। रणधीर सिंह कापड़ीवास ने 6 में से 5 चुनाव हारे हैं लेकिन चेहरे पर चमक हमेशा विजेता वाली रही है। इसलिए वे राजनीति से ज्यादा पारिवारिक ओर सामाजिक तोर पर रेवाड़ी से ज्यादा जुड़ाव रखते हैं। यही वजह है की जब भी निर्दलीय मैदान में उतरे बेहद ही सम्मानजनक वोट लेकर अपनी दमदार मौजूदगी का अहसास कराया। 2024 के चुनाव में भी यह परिवार पूरी तरह से चुनाव लड़ने का मन बना चुका है। एक तरफ रणधीर सिंह कापड़ीवास का राजनीति अनुभव ब्रह्माशास्त्र का काम करेगा वही मुकेश की युवा ऊर्जा भी इस सीट पर मजबूत पोजीशन को आगे बढ़ा रही है। मुकेश लगातार पिछले एक साल के अंतराल से चाय पर चर्चा अभियान चला रहे हैं। भाजपा के अनेक शीर्ष नेताओं एवं संघ के  प्रमुख चेहरों के समक्ष उनका राजनीति इंटरव्यू हो चुका है।  अब देखना यह है की भाजपा हाईकमान मौजूदा हालात में इस सीट पर ताऊ- भतीजे के बीच में किस पर जीत का दांव चलाती है या अन्य प्रमुख दावेदारों के बायोडाटा पर फैसला लेती है। इतना जरूर है की इस चुनाव में कापड़ीवास परिवार अपना पूरा होमवर्क कर चुका है। इसलिए भाजपा को  जीत हासिल करने के लिए इस परिवार के हस्ताक्षर लेने भी जरूरी है। यह सबकुछ मिलने वाली टिकट से तय होगा। इसलिए भाजपा हाईकमान के लिए रेवाड़ी सीट पर उम्मीदवार का चयन बेहद की कठिन परीक्षा ओर चुनौती से कम नही है।