रेवाड़ी- धारूहेड़ा चेयरमैन सीट पर भाजपा की शानदार जीत ने कांग्रेस को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
नगर परिषद रेवाड़ी और नगर पालिका धारूहेड़ा चुनाव परिणामों की तस्वीर ने सभी हैरान किया हुआ है। नगर पार्षदों के नतीजों ने एक तरफ भाजपा को आईना दिखाया, कांग्रेस को किसी लायक नही छोड़ा। ऐसा लग रहा है की कांग्रेस पूरी तरह से मिटटी मिलती जा रही हैँ जहां से उसे उबरने में अब लंबा समय लगेगा। इस बार के चेयरमैन पद पर भाजपा की शानदार जीत ने यह बता दिया है की वोटर कहां चोट कर सकता है और कहां पर मरहम लगाकर यह अहसास करा देता है की उसे समझने कोई गलती नही करें। दोनों सीटों पर चेयरमैन पद पर मिली जीत से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का दबदबा कायम रहा। अब वे खुलकर हाईकमान के सामने अपने विरोधियों पर जमकर प्रहार कर सकते हैं जिसके लिए वे जाने जाते हैं। जाहिर है राव आने वाले दिनों में ऐेसा करते हुए नजर भी आएंगे। उनका यही अंदाज राजनीति में उन्हें अलग रखता है। इतना ही नही चुनाव में रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने भी सभी प्रत्याशियों व चेयरपर्सन की जीत के लिए जमकर पसीना बहाया। यह किसी से छिपा नही है। भाजपा जिला अध्यक्ष वंदना पोपली भी आपसी सामंजस्य बनाने में कामयाब रही। जीत के बाद यह सबकुछ श्रेय की श्रेणी में आता है जिन पर चुनाव की विशेष जिम्मेदारी थी। अगर इसके विपरित परिणाम आते तो जाहिर है जिम्मेदार ठहराने के लिए भी आपसी हमलों में भी कमी नही होती।
नगर परिषद रेवाड़ी से भाजपा प्रत्याशी विनिता पीपल शानदार 21 हजार 455 वोटों से विजयी हुईं। कमाल देखिए विनिता पीपल वार्ड नंबर से 3 से पार्षद रही है और यह उसका पृतक वार्ड है। इस वार्ड में नगर पार्षद पद से कांग्रेस के प्रवीण चौधरी विजयी रहे हैं जिसकी पत्नी नेहारिका चौधरी कांग्रेस की टिकट पर विनिता पीपल के सामने खड़ी हुई थी। है ना कमाल की राजनीति। इसी तरह जिन वार्डों से नगर पार्षद पद के लिए भाजपा उम्मीदवार हारे हैं वहां से भाजपा चेयरपर्सन को अच्छे खासे वोट मिले हैं। मतदाता क्या सोचकर अपने मत का प्रयोग कर रहा है। इसका कोई गणित नही निकाल सकता। इतना जरूर है की रेवाड़ी की जनता ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर वार्ड स्तर पर भाजपा और कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी दिखाने में कोई कसर नही छोड़ी। एक तरफ उसने भाजपा के उन पार्षदों को भी घर बैठा दिया जिनकी राजनीति में कभी हार ही नही लिखी थी इसमें वार्ड 20 से पूर्व चेयरनमैन विजय राव प्रमुख तौर से शामिल है। ऐसे बहुत से उदाहरण है जिसके परिणामों ने दोनो ही बड़े राजनीतिक दलों खासतौर से कांग्रेस से पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव एवं उनके पुत्र पूर्व विधायक चिरंजी राव को यह अहसास करा दिया है की गुरुग्राम से रेवाड़ी की दूरी ने उन्हें अपनी राजनीति की जड़ों से तेजी से अलग करना शुरू कर दिया है। समय रहते इस पर मंथन जरूर कर ले नही तो आने वाले समय में जनता जड़ों को भी उखाड़ने में देर नही लगाती है।
धारूहेड़ा से अजय जांगडा शुरूआत से ही मजबूत रहे
नगर पालिका धारूहेड़ा में चेयरमैन पद के लिए अजय जांगडा शुरूआत से ही मजबूत नजर आ रहे थे। वाइस चेयरमैन रहते हुए उन्होंने जनता के बीच अपनी मजबूत छवि बनाई हुई थी। केंद्रीय राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से मिली टिकट के बाद करीब 18 हजार पड़े मतों में जांगडा शुरूआत से ही बढ़त के साथ आगे बढ़ रहे थे। वे 6236 वोटों से विजयी रहे।
रेवाड़ी में कांग्रेस की हार की वजह साफ है
कांग्रेस प्रत्याशी की हार इतनी करारी होगी। यह किसी को उम्मीद नही थी। कांग्रेस की ऐसी हालत उस समय हुई जब शहर का मतदाता पिछले पांच सालों से भाजपा के नप कार्यकाल से बेहद आहत था। भाजपा टिकट बंटवारे को लेकर दो हिस्सों में बंटी हुई थी। जिसमें एक तरफ राव इंद्रजीत सिंह दूसरी तरह राव के खिलाफ का खेमा। इसके बावजूद मतदाताओं ने कांग्रेस को हर लिहाज से किसी स्तर का नही छोड़ा। इसकी प्रमुख वजह शुरूआत से ही कांग्रेस के नेता व उसकी पार्टी के कर्ताधर्ता ईमानदारी से चुनाव लड़ नही रहे थे। सही मायनों में कांग्रेस को जितने भी वोट मिले हैं उसमें भी अधिकतर कांग्रेस को नही मिले । यह जनता की भाजपा के प्रति नाराजगी रही थी जो वोट की शक्ल में कांग्रेस को देना उनकी मजबूरी थी। इस करारी हार से कप्तान परिवार की राजनीति अब पूरी तरह से जड़ो तक हिल चुकी है। इसके लिए वे खुद जिम्मेदार है। इस चुनाव में टिकट को लेकर कप्तान की कांग्रेस में जमकर चली है। जाहिर है नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। अब वे चाहकर भी किसी पर हार का ठीकरा नही फोड़ सकते। दूसरी कांग्रेस हार की प्रमुख वजह चेयरपर्सन टिकट को लेकर आपसी गहरा विवाद। नेहरारिका चौधरी कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण चौधरी की धर्मपत्नी है। यानि प्रवीण चौधरी पार्टी में प्रमुख पद पर भी है, खुद पार्षद का चुनाव भी सिंबल पर लड़ रहे हैं और अपनी पत्नी को भी चेयरपर्सन को टिकट दिला रहे हैं। इससे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में रोष था की जब सबकुछ ही एक ही परिवार को देना है तो जीत की जिम्मेदारी भी वह ले। कांग्रेस टिकट नही मिलने पर पूर्व चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया निर्दलीय मैदार में उतर गई थी जिसे बाद में ऐन वक्त पर कप्तान ने घर वापसी करा दी थी लेकिन तब तक कांग्रेस को अच्छा खासा नुकसान हो चुका था।
विधायक लक्ष्मण सिंह की जीत का आंकड़ा सही निकला
12 मई को रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने पत्रकारों से बातचीत में पूरी जिम्मेदारी के साथ यह दावा किया था की भाजपा चेयरपर्सन 10 हजार से ज्यादा वोटों से आसानी से जीत रही है। परिणाम भी उसी के अनुरूप आए। इससे स्पष्ट जाहिर होता है की चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा कार्यक्रम व सभाएं करने वाले लक्ष्मण यादव ने जनता का रूख पहचान लिया था। इसलिए एक दिन पहले ही जीत की भविष्यवाणी कर दी।