यह लेख नहीं मौजूदा मानसिकता का अहसास है.. जरूर पढ़े

छात्रों की मौत शिक्षा तंत्र को निवस्त्र कर रही है… कोई है जो बचाए.. — शिकारी…

हम अपने बच्चों का नाम क्या सोचकर रखते हैं पढ़िए डंके की चोट पर

द्रोण, कर्ण- भीष्म गलत के साथ थे, उन पर गर्व, जिसकी वजह से पापी रावण मरा,…

चुनाव जीतते दल, हारता लोकतंत्र

 रणघोष खास. कुमार प्रंशात लोकतांत्रिक प्रसव वेदना से गुजर रहे दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और गुजरात के…

बीजेपी को चुनाव जिताने वाले नेताओं की ज़रूरत है ?

रणघोष खास. श्रवण गर्ग  गुजरात और हिमाचल की विधानसभाओं ,दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसीडी) और मैनपुरी (यूपी)…

आखिर संडाध सिस्टम- लालची डॉक्टरों ने मिलकर मनोज को मार ही दिया

– क्या आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार के लोग इसी तरह मरते रहेंगे।  पैसो की हवस…

पढ़ा लिखा समझदार जाति का जहर फैलाए समझ जाइए वह सबसे खतरनाक है..

रणघोष खास. प्रदीप नारायण इस बात को ईमानदारी से स्वीकार कर लिजिए गांव की चौपाल से…

हाथ जोड़कर विनती है मीडिया को चौथा स्तंभ कहना बंद किजिए, यह प्रोडेक्ट है…

मौजूदा चल रहे माहौल में बस एक समझ काम करती है। खुद के प्रति ईमानदार रहिए,…

पढ़िए जिले के सबसे उम्रदराज जिला पार्षद उम्मीदवार 75 वर्षीय दादा जयपाल की कहानी

सच को सच कहने की हिम्मत से जयपाल सिंह सभी के दादा बन गए रणघोष खास. …

पढ़िए अटेली विधानसभा के गांव सैदपुर को नेशनल मॉडल विलेज बनाने के इरादे से चुनाव में उतरे 34 साल के विकास की कहानी..

16 साल की उम्र में ही समाजसेवा का जुनुन, अब गांव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का…

कलम कुछ कहती है..एक शुभकामना अपने आपको भी दीजिए, खुद पर गर्व करिए

कलम के बूते मैं खिलता हूँ ,कलम के चलते ही मैं जीता हूं, मै पत्रकार हूं…

रणघोष की सीधी सपाट बात में इस सच को भी स्वीकार कर लिजिए

अखबारों के लोकलपुल आउट ने पत्रकारों को बाबू बना दिया – पाठक बचे नहीं उपभोक्ता- छपास…

स्त्री को देवी बनाकर स्त्री से अलग कर दिया!

यदि देवी माता स्त्री जैसी स्त्री है तो उसका नौ दिन ही पूजा पाठ क्यों हो,…

अच्छा है सत्यनारायण चुपचाप चला गया, एक पत्रकार की अहमियत तब तक है जितनी वेश्या की जवानी..

–असल सच यह है कि मौजूदा बाजारू पत्रकारिता में एक पत्रकार की मौत इसलिए मायने नहीं…

‘भारत जोड़ो यात्रा’ क्या नई यात्रा को जन्म देगी?

पिछले एक दशक के दौरान योजनाबद्ध तरीक़े से इतना कुछ बदल कर नागरिकों के जीवन में…

चीते के साथ डर दौड़ता है, गाय के साथ मां चलती है, इसलिए लंपी वायरस को सीरियस मत लिजिए

रणघोष खास. प्रदीप नारायण जिस तरह देश में ईडी- इंकम टैक्स- सीबीआई समेत अनेक तरह की…

सभी पाठकों को नमस्कार , समस्त रणघोष परिवार आपका तहे दिल से शुक्रगुजार है बस आप इसी तरह से हमारा साथ देते रहे . हम पूरी ताकत के साथ आपकी आवाज़ बनते रहेंगे . Please Subscribe Our Digital Channels

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रितू की यह कहानी बाजारू शिक्षकों पर तमाचा, कोचिंग सेँटरों पर ताला लगा देगी, जरूर पढ़े..

जो रिश्तेदार- परिवार के दूर दराज सदस्य रितू की पढ़ाई के खिलाफ थे। वे नसीहत देते…

जय किशोरी का एक एक शब्द डॉलर से भी महंगा, इसलिए सुनना बहुत जरूरी है..

सोचिए अगर वह अपनी कथा की सम्मानजनक फीस नहीं लेती। मिलने मिलाने के कड़े नियम कायदे…

डंके की चोट पर रणघोष ने लिखा वहीं साबित हुआ

तनिष्का की सफलता पर बाजार का हमला, एएलएलईएन- नारायणा- आकाश का दावा यह हमारे उपलब्धि  क्या…

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