संजय राउत का बड़ा बयान – पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की सुरक्षा को बताया खतरा

संजय राउत का बड़ा बयान – पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एक बार फिर अपने आक्रामक अंदाज में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को खतरा होने की आशंका जताते हुए कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत में राउत ने कहा कि संसद में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने उन्हें बोलने से रोक दिया। राउत के अनुसार यह सही नहीं था और इससे उन्हें नरवणे की सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी है।

“राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिक नेतृत्व को लेना चाहिए निर्णय”

संजय राउत ने कहा कि जब देश पर संकट आता है या कोई पड़ोसी देश हमला करने की तैयारी में सीमा तक पहुंच जाता है, तब राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनरल नरवणे बार-बार आदेश मांग रहे थे कि चीन के अतिक्रमण का जवाब देने के लिए क्या कार्रवाई की जाए, लेकिन “56 इंच का सीना रखने वाले भाग गए।”

उन्होंने दोहराया कि मौजूदा हालात को देखते हुए पूर्व सेना प्रमुख की सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है। राउत ने कहा कि पहले भी इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं, इसलिए किसी भी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सोनम वांगचुक का भी किया जिक्र

राउत ने सवाल उठाते हुए कहा, “आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था? उन्होंने भी तो सीमा सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।” उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

संसद में कैसे शुरू हुआ विवाद?

दरअसल सोमवार को लोकसभा में उस समय जोरदार हंगामा हुआ, जब राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की गैर-प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए बोलने लगे। उन्होंने डोकलाम में भारतीय सीमा के पास चीनी टैंकों के पहुंचने का कथित मामला उठाया।

विवाद तब और बढ़ गया जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि संसद में किसी ऐसी पुस्तक को उद्धृत नहीं किया जा सकता जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है। उनका तर्क था कि यदि पुस्तक में लिखे तथ्य सही होते, तो उसे प्रकाशित होने से रोका नहीं जाता।

सियासत गरमाने के आसार

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे नियमों और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन बता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के अंदर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में देश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर जब इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना जैसे संवेदनशील विषय शामिल हों।