सरदार का अपमान… रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार’ बताने पर राहुल गांधी घिरे, भाजपा ने सिख समुदाय से जोड़ा मामला

Rahul Gandhi Controversy: Ravneet Bittu को ‘गद्दार’ कहने पर BJP का हमला, Sikh Community से जोड़ा मुद्दा

Rahul Gandhi द्वारा Ravneet Singh Bittu पर ‘गद्दार’ टिप्पणी के बाद विवाद गहराया। BJP ने इसे सिखों के अपमान से जोड़ा, सिरसा और बिट्टू का तीखा पलटवार।

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संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर ‘गद्दार’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। इस मामले को भाजपा ने अब सिख समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एक सिख मंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा न केवल अनुचित है, बल्कि सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजरिंदर सिंह सिरसा ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने एक सिख मंत्री के लिए जिस शब्दावली का प्रयोग किया है, वह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि यदि कोई गद्दार है तो वह राहुल गांधी स्वयं हैं। सिख सरदार कभी गद्दार नहीं हो सकता। एक सिख के खिलाफ इस तरह के शब्द यह दर्शाते हैं कि कांग्रेस की सोच आज भी नहीं बदली है।

सिरसा ने आगे कहा कि कांग्रेस की मानसिकता में सिखों के प्रति आज भी वही जहर भरा हुआ है, जो 1980 के दशक में दिखाई देता था। उन्होंने आरोप लगाया कि यही वे लोग थे, जिन्होंने श्री दरबार साहिब पर टैंकों से हमला कराया, अकाल तख्त साहिब को नुकसान पहुंचाया और सिखों को जिंदा जलवाया। सिरसा ने लोकसभा अध्यक्ष से राहुल गांधी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग भी की।

वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद परिसर में सड़क के गुंडे जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। बिट्टू के मुताबिक, जिस तरह से राहुल गांधी उनकी ओर बढ़े, उससे ऐसा लग रहा था कि वह धक्कामुक्की करना चाहते हैं, लेकिन केसी वेणुगोपाल ने उन्हें रोक लिया।

1984 के दंगों का किया जिक्र

रवनीत सिंह बिट्टू ने इस दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से बड़ा गद्दार कोई नहीं हो सकता। बिट्टू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों ने हजारों सिखों की हत्या करवाई और सिखों के सबसे पवित्र गुरुद्वारों पर हमले कराए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता शहीद राजीव गांधी के नारे लगाते हैं, तब सरदार बेअंत सिंह को शहीद-ए-आजम भी कहा जाता है।

बिट्टू ने यह भी कहा कि पंजाब की समस्याओं और वहां फैले आतंकवाद को खत्म कराने में उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह की अहम भूमिका रही थी। उल्लेखनीय है कि रवनीत सिंह बिट्टू पहले कांग्रेस सांसद रह चुके हैं और वर्ष 2024 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।

कांग्रेस ने भी संभाला मोर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भी जवाबी रणनीति अपनाई है। संसद परिसर में हुई बहस पर कांग्रेस की ओर से पंजाब के सांसदों को आगे किया गया। अमरिंदर सिंह वड़िंग ने कहा कि राहुल गांधी ने कई नेताओं को पहचान दी, जिनमें रवनीत सिंह बिट्टू भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए हैं, वे अब दूसरों को खुश करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने भी कहा कि विपक्ष को संसद में बोलने ही नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नेता विपक्ष को बोलने का मौका नहीं मिलेगा, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा। उनके मुताबिक, विपक्ष के सांसद भी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और उनकी आवाज दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

इस पूरे विवाद ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। भाजपा इसे सिख समाज के सम्मान से जोड़कर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।